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अरुण जेटली ने दी 15वें वित्त आयोग को बनाने की मंजूरी 

जजो को भी मिलेगा 7वें वेतन आयोग का लाभ

22 नवम्बर 2017

नई दिल्ली - सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के वेतन बढ़ोतरी प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को मंजूरी दे दी है। अब जजों को सातवें वेतन आयोग का लाभ मिलेगा। इसका लाभ 31 सुप्रीम कोर्ट, 1000 हाईकोर्ट और 2500 रिटायर जजों को मिलेगा।
वित्त मंत्री अरुण जेटली और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए फैसलों की जानकारी दी। प्रसाद ने कहा कि वेतन में वृद्धि के संदर्भ में संसद में एक विधेयक पेश किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि साल 2016 में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर ने इस बारे में सरकार को पत्र लिखा था और उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन में वृद्धि की मांग की थी।

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को अभी वेतन और भत्ते से सभी तरह की कटौती के बाद प्रति माह 1.5 लाख रूपये प्राप्त होते हैं। प्रधान न्यायाधीश को थोड़ा अधिक वेतन प्राप्त होता है।
इधर, वित्तमंत्री जेटली ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15वें वित्त आयोग बनाने को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि इसके नियम व शर्तें समय आने पर अधिसूचित होंगी। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केंद्रीय लोक उपक्रमों (सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज-सीपीएसई) में कार्यरत श्रमिकों की मजदूरी में संशोधन की आठवें दौर की वार्ता के लिए मजदूरी-नीति को भी मंजूरी दे दी।
सूत्रों के अनुसार सीपीएसई का प्रबंधन श्रमिकों के साथ मजदूरी पर संशोधन को बातचीत के लिए स्वतंत्र है। इन उपक्रमों में पांच साल या दस साल का मजदूरी समझौता 31 दिसंबर, 2016 को समाप्त हो गया है।
हालांकि, इस तरह की मजदूरी बढ़ोतरी के लिए किसी तरह का बजटीय सहयोग उपलब्ध नहीं कराएगी। संबंधित सीपीएसई को इसका पूरा बोझ अपने संसाधनों से उठाना पड़ेगा। इसके अलावा सीपीएसई के प्रबंधन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित वेतनमान मौजूदा कार्यकारियों तथा संबंधित कंपनियों के यूनियन के बाहर के कंपनियों से अधिक न होने पाए।
सरकार दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता कानून में जरूरी संशोधन के लिए अध्यादेश जारी करेगी। वित्त एवं कार्पोरेट कार्य मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को यह कहा। यह कानून पिछले साल दिसंबर में लागू हुआ।
इस कानून में कर्ज में फंसी कंपनियों की संपत्तियों का बाजार निर्धारित दर पर समयबद्ध निपटारा किए जाने का प्रावधान किया गया है। कानून को कार्पोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा अमल में लाया जा रहा है। जेटली ने यहां संवाददाताओं को बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कानून में कुछ बदलाव करने के लिए अध्यादेश लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
7वां वेतन आयोग प्रक्रिया
हालांकि, कानून में क्या संशोधन किए जाएंगे, इसके बारे में तुरंत कोई जानकारी नहीं दी। सरकार की ओर से यह पहल ऐसे समय की जा रही है, जब कानून के कुछ प्रावधानों को लेकर कुछ क्षेत्रों में चिंता व्यक्त की गई।
इसमें एक मुद्दा इसको लेकर भी उठा है कि कानून की खामियों का फायदा उठाते हुये दिवाला प्रक्रिया में आई कंपनी पर उसके प्रवर्तक फिर से नियंत्रण हासिल करने की जुगत लगा सकते हैं। कार्पोरेट कार्य मंत्रालय ने कानून की कमियों की पहचान करने और उनका समाधान बताने के बारे में 14 सदस्यीय एक समिति गठित की है।
कापोर्रेट कार्य सचिव इंजेती श्रीनिवास की अध्यक्षता में गठित दिवाला कानून समिति कानून के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं पर गौर करेगी। दिवाला संहिता के तहत अब तक 300 मामले नेशनल कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में समाधान के लिये दर्ज किये जा चुके हैं। दिवाला कानून में एनसीएलटी से मंजूरी मिलने के बाद ही किसी मामले को समाधान के लिए आगे बढ़ाया जाता है।
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