फोर्टिस अस्पताल ने कफन के लिए 700 रुपए ,एम्बुलेंस देने से किया मना,ओर इस तरह वसूल लिए 16 लाख रुपए
23 नवम्बर 2017
नई दिल्ली- गुड़गांव के फोर्टिस अस्पताल में डेंगू के कारण 7 साल की बच्ची की मौत हो गई। इसकी एवज में अस्पताल वालों ने 16 लाख रुपए वसूल लिए। बच्ची के पिता जयंत सिंह का कहना है कि जब तक वे पैसा देते रहे, अस्पताल का व्यवहार बहुत अच्छा रहा, लेकिन जैसे ही उन्होंने बेटी को ले जाने के लिए कहा तो उनका व्यवहार बदल गया। अस्पताल ने बच्ची के तन पर पहने कपड़ों तक के 900 रुपए वसूल लिए। यही नहीं, अस्पताल ने कफन के भी 700 रुपए लिए।
बच्ची के पिता जयंत सिंह ने बताया कि आखिरी में अस्पताल ने एम्बुलेंस तक देने से मना कर दिया। यहां तक कि उन्होंने ये भी कहा कि हम डेथ सर्टिफिकेट भी नहीं देंगे। .......
ये है पूरा मामला.......
दिल्ली के द्वारका में रहने वाले जयंत सिंह की सात साल की बेटी आद्या को 27 अगस्त से तेज बुखार था। दूसरे ही दिन उसे रॉकलैंड अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां दो दिन भर्ती रहने के बाद उन्होंने गुड़गांव के फोर्टिस अस्पताल में रेफर कर दिया। डॉक्टरों ने बच्ची को अगले दस दिन लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा।
दिल्ली के द्वारका में रहने वाले जयंत सिंह की सात साल की बेटी आद्या को 27 अगस्त से तेज बुखार था। दूसरे ही दिन उसे रॉकलैंड अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां दो दिन भर्ती रहने के बाद उन्होंने गुड़गांव के फोर्टिस अस्पताल में रेफर कर दिया। डॉक्टरों ने बच्ची को अगले दस दिन लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा।
ऐसे आया मामला सामने .......
दरअसल, बच्ची के पिता जयंत सिंह के एक दोस्त ने @DopeFloat नाम के हैंडल से 17 नवंबर को हॉस्पिटल के बिल की कॉपी के साथ ट्विटर पर पूरी घटना शेयर की।
उन्होंने इसमें लिखा, ''मेरे साथी की 7 साल की बेटी डेंगू के इलाज के लिए 15 दिन तक फोर्टिस हॉस्पिटल में भर्ती रही। हॉस्पिटल ने इसके लिए उन्हें 16 लाख का बिल दिया। इसमें 2700 दस्ताने और 660 सीरिंज भी शामिल थीं। आखिर में बच्ची की मौत हो गई।''
4 दिन के भीतर ही इस पोस्ट को 9000 से ज्यादा यूजर्स ने रिट्वीट किया। इसके बाद हेल्थ मिनिस्टर जेपी नड्डा ने हॉस्पिटल से रिपोर्ट मांगी।
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फोर्टिस अस्पताल की ओर से जारी बयान के मुताबिक, ''बच्ची के इलाज में सभी स्टैंटर्ड मेडिकल प्रोटोकॉल और गाइडलाइन्स का ध्यान रखा गया था। बच्ची को डेंगू की गंभीर हालत में हॉस्पिटल लाया गया था। बाद में उसे डेंगू शॉक सिंड्रोम हो गया और प्लेटलेट्स गिरते चले गए। उसके बाद उसे IV फ्लूड्स और सपोर्टिंग ट्रीटमेंट पर रखा गया। उसे 48 घंटे तक वेंटिलेटर सपोर्टर पर भी रखना पड़ा।''
अस्पताल ने कहा, ''परिवार को बच्ची की खराब हालत के बारे में हर दिन लगातार बताया गया था। 14 सितंबर को परिवार ने बच्ची को लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस के तहत अस्पताल से ले जाने का फैसला किया। उसी दिन बच्ची की मौत हो गई।''
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