डीजे और ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर प्रतिबंध
23 नवम्बर 2017
भीलवाड़ा- जिला मजिस्ट्रेट एवं जिला कलक्टर मुक्तानन्द अग्रवाल ने राजस्थान ध्वनि नियंत्रण अधिनियम 1963 की धारा 5 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आदेश जारी कर संपूर्ण भीलवाड़ा जिले (नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों सहित) में सार्वजनिक स्थानों, धार्मिक स्थानों एवं आमजन को प्रभावित करने वाले क्षेत्रों में वातावरण शांतिमय बनाये रखने के लिये तीव्र ध्वनि विस्तारक यंत्र (डीजे) के प्रयोग को निषेध घोषित किया है। जिला मजिस्ट्रेट ने आदेश में कहा है कि कोई व्यक्ति या समूह या प्रतिनिधि किसी भी प्रकार के धार्मिक एवं अन्य समारोह के लिये तीव्र ध्वनि विस्तारक यंत्र (डीजे) का उपयोग बिना अनुमति नहीं करेगा। यदि कोई इनका उपयोग करना चाहे तो संबंधित उपखण्ड मजिस्टे्रट की अनुमति प्राप्त करनी होगी। रात्रि 10 बजे बाद तथा प्रातः 6 बजे के मध्य के लिये स्वीकृति प्रदान नहीं की जायेगी। स्वीकृति उपरान्त भी ध्वनि प्रदूषण का स्तर ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम 2000 की अनुसूचि में निर्धारित स्तर से अधिक नहीं हो सकेगा। इन आदेशों की पालना कड़ाई से सुनिश्चित की जायेगी। इसका उल्लंघन भारातीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत दंडनीय अपराध होगा। ये आदेश पूर्व में एक अगस्त 2017 को जारी आदेशों की निरन्तरता में दिये गये हैं तथा तुरन्त प्रभाव से लागू हो गये हैं।




