बिहार के लाल गरुड़ कमांडो ज्योति प्रकाश निराला पंचतत्व में विलीन…
21 नवम्बर 2017
रोहतास- जम्मू कश्मीर में हुए आतंकी मुठभेड़ में बिहार के एक जाबांज सिपाही ने अपनी शहादत दी. सूबे के रोहतास जिला के काराकाट थाना के बादिलडिह गांव के रहने वाले ज्योति प्रकाश निराला कश्मीर के बांदीपुरा में आतंकी मुठभेड़ में शहीद हो गए. ज्योति प्रकाश निराला का शव कल सुबह बिहटा एयरफोर्स केंद्र पहुंचा।
शहीद के पार्थिव शरीर को वायुसेना और आर्मी के अधिकारियों और जवानों ने सलामी दी यरफोर्स बिहटा के जवानों ने गार्ड ऑफ आनर तथा पूरे सम्मान के साथ उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव भेजा गया. जहाँ अंतिम दर्शन के लिए शहीद के पार्थिव शरीर को घर के बाहर दरवाजे पर रखा गया. सुबह से ही अपने बहादुर बेटे की आस में नाम आखों से टकटकी लगाये गाँव के लोग पार्थिव शारीर के पहुँचते ही उमड़ पड़े. मौके पर गाँव वालों के अलावे डीआइजी, डीएम समेत काफी संख्या में लोगों ने पुष्पचक्र अर्पित किए।
एयरफोर्स गरूड़ कमांडो ज्योति प्रकाश निराला का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया. शहीद के घर से शव यात्रा आरंभ हुई जिसमे उद्योग मंत्री जयकुमार सिंह, पूर्व मंत्री डॉ. कांति सिंह, पूर्व विधायक राजेश्वर राज, शहाबाद रेंज के डीआइजी मो. रहमान, डीएम अनिमेष कुमार पराशर के अलावे गाँव के लोग पुरे गाँव में भ्रमण करते हुए अंतिम संस्कार स्थल गांव के प्राथमिक विद्यालय के समीप स्थित सरकारी भूमि पर पहुंचे. बांदीपोर के शहीद अमर रहे, वंदे मातरम, भारत माता की जय, बदिलाडीह के लाल, तूने कर दिया कमाल के नारे से पुरा इलाका गूंज उठा. जहाँ एक तरफ इस बहादुर बेटे को खोने का गम हर किसी के दिल में था वहीं शहीद की पराक्रम पर गर्व भी लगभग पांच बजे पिता तेजनारायण सिंह ने अपनी चार वर्षीया पौत्री जिज्ञासा के साथ इकलौते शहीद पुत्र को मुखाग्नि दी. इस हीद ज्योति अमर रहे. इससे पहले शहीद का शव पहुंचते ही पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगाए गए।
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गौरतलब है कि बांंदीपुरा के हाजिन एरिया में शनिवार को सेना के संयुक्त ऑपरेशन में सुरक्षा बलाें ने छह आतंकियों को मार गिराया था. विदित हो कि इस अभियान में शहीद ने अकेले पांच आतंकियों को ज्योति प्रकाश ने मार गिराया था. आतंकियों के छिपे हाेने की सूचना के बाद सुरक्षा बलाें ने हाजिन क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन चलाया था. इसी दौरान आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग करना शुरू कर दिया जिसकी जवाब में बिहार के लाल ने सबसे पहले मोर्चा सँभालते हुए आतंकियों पर टूट पड़े. विदित हो कि ज्योति प्रकाश 2005 में वायुसेना में भर्ती हुए थे वह गरुड़ कमांडो थे. ज्योति अपने पीछे पत्नी एक बेटी तथा चार बहन को छोड़ गए हैं जिसमे एक की शादी हो चुकी है ।





