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24 नवम्बर 2017

दरअसल, रिलायंस इंडस्ट्रीज की गैस के दाम बढ़ाने से जुड़े मामले में जारी जांच पर रोक लगाने से दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को इनकार कर दिया। केजी-6 घाटी के गैस की कीमत बढ़ाने के लिए हुए घोटाले को लेकर पूर्ववर्ती UPA सरकार के 2 मंत्रियों समेत रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के खिलाफ FIR दर्ज हुई थी।
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पहले ही काफी संरक्षण दिया जा चुका है। हाई कोर्ट ने एक आदेश में कहा था कि इस मामले में कोई दबाव डालने वाला कदम नहीं उठाया जाना चाहिए। हाई कोर्ट में रिलायंस इंडस्ट्रीज की यचिका पर सुनवाई चल रही थी। रिलायंस ने दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार रोधी शाखा (ACB) द्वारा 2015 से कुछ नहीं किए जाने और अब उसके तीन वरिष्ठ अधिकारियों को हाल ही में समन जारी किए जाने का हवाला देकर अपनी याचिका में जांच पर रोक लगाने की मांग की थी।
ACB की प्राथमिकी में कंपनी के अलावा UPA के मंत्रियों एम. वीरप्पा मोइली और मुरली देवड़ा (निधन तक), रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी, कंपनी की हाइड्रोकार्बन इकाई के पूर्व महानिदेशक वी. के. सिब्बल और कुछ अज्ञात लोगों के नाम शामिल हैं। इस तरह के मामलों की सुनवाई को लेकर एसीबी के न्यायाधिकार के मुद्दे पर जस्टिस ए. के. चावला ने कहा कि इसकी सुनवाई हाई कोर्ट की संविधान पीठ कर रही है और इस कारण इसके बारे में शीर्ष अदालत के निर्णय के बाद सुनवाई करना उचित होगा।
हाई कोर्ट ने कहा, 'हम कुछ समय रुक सकते हैं। आपके हितों की रक्षा करने के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं। पिछले आदेश में ही कोई दबाव डालने वाला कदम नहीं उठाने के लिए कहा जा चुका है।' कोर्ट ने इसके बाद रिलायंस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी को यह विचार करने के लिए समय दिया कि वह रोक लगाने के आवेदन पर जिरह जारी रखेंगे या हाई कोर्ट के आदेश का इंतजार करेंगे। इसके बाद कोर्ट ने मामले को 6 दिसंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
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