Breaking News
recent

अब शिक्षा मंदिर का हो गया सौदा...


नागौर।  जिले की 27 स्कूलों के मालिक अब निजी एजेंसी से जुड़े लोग होंगे। इनमें तैनात स्टॉफ भी उनका होगा और गतिविधियां भी उनकी इच्छानुसार ही चलेगी। इसे स्वायत्तशासी संस्था के तौर पर माना जाएगा। इन स्कूलों की बाकायदा मंडी की तरह खुली नीलामी होगी। इन्हें पहले 10 साल तक की समयावधि में पीपीपी मोड पर दिया जाएगा। बाद में अवधि 15 साल तक बढ़ाई जा सकती है। विशेष बात यह है कि ऐसे विद्यालयों को रमसा की न केवल समस्त योजनाओं का लाभ मिलेगा, बल्कि मिड डे मील एवं पाठ्युपस्तकें भी दी जाएगी। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सबकुछ सरकार का, लेकिन शासन ठेकेदार का, के तर्ज पर कामचलेगा। इसको लेकर आमजन में सरकार के प्रति न केवल रोष के स्वर मुखर होने लगे हैं, बल्कि अब उनके अंदर शासन के रवैए को लेकर खुलकर उनका विरोध भी सामने आने लगा है।
        प्रदेश के अन्य शिक्षण संस्थानों के साथ ही जिले की कुल 27 स्कूलों को भी पीपीपीमोड यानी की ठेके के तहत दिए जाने की तैयारियों में जिम्मेदार जुट गए हैं। इनमें से कई स्कूलें प्रमुख मार्गों पर स्थापित होने के साथ ही नामांकन के मामले में भी अव्वल रहीं हैं। ऐसी स्कूलों को भी पीपीपीमोड पर दिए जाने की फेरहिस्त में शामिल करना लोगों की समझ से परे रहा है। इस संबंध में शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बातचीत हुई तो उनका स्पष्ट मानना था कि सबकुछ जनता की गाढ़ी कमाई का फिर, सरकार को उसे बेचने का हक कैसे मिल गया। इस संबंध में सरकार को जनता से रायशुमारी करने के बाद ही इस तरह के निर्णय लेने चाहिए थे

पैसा जनता का, मालिक ठेकेदार बनेगा
       पीपीपीमोड पर दिए जाने के बाद इसमें तय प्रावधानों के तहत एक निजी एजेंसी कई स्कूलों को एक साथ ले सकेगी। इसके बाद उसमें अपना खुद का स्टॉफ तैनात करने के बाद भी शुल्क निर्धारण भी सरकारी निर्धारित मापदंड में किया जाना है। योजनाओं का पूरा लाभ मिलेगा। मसलन रमसा की योजनाओं के साथ ही मिड डे मील, छात्रवृत्ति एवं पाठ्युपस्तकें पहले की तरह ही मिलेगी। निजी एजेंसी की ओर से तकरीबन 75 लाख तक का व्यय करने पर सरकार उस राशि को 12 फीसदी ब्याज के साथ 16-16 की राशि के रूप में सात साल में लौटा देगी।
बीकानेर निदेशक को सौंपेंगे स्टॉफ
      पीपीपीमोड से संबंधित स्कूलों के स्टॉफ को निदेशक बीकानेर के सुपुर्द कर दिया जाएगा। अब निदेशक की ओर से इन शिक्षकों को अन्यत्र पदों से खाली स्कूलों में समायोजन किया जा सकता है, या फिर क्या किया जाएगा, इसका निर्णय निदेशक की ओर से होगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि समस्त सरकारी योजनाओं के लाभ के साथ ही फीस निर्धारण का अधिकार संचालक को सौंपना स्कूल सौंप दिया जाने का निर्णय से साफ है कि खर्च तो सरकार करेगी, लेकिन बागडोर निजी हाथों में रहेगी। इससे स्कूल की गुणवत्ता सुधरेगी या फिर बिगड़ेगी। यही नहीं स्कूलों में सीटों की संख्या भी कक्षावार निश्चित कर दिए जाने का अधिकार भी सौंप दिया जाने से स्पष्ट है कि कमजोर तबके बच्चे ऐसे स्कूलों में प्रवेश नहीं ले सकेंगे।

इन्होने कहा-
     पीपीपीमोड पर दिए जाने वाली अधिकतर स्कूलें न केवल प्रमुख मार्गों पर स्थापित हैं, बल्कि उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रदर्शन भी बेहतर रहा है। इससे स्पष्ट है कि शिक्षण संस्थानों को सरकार ने बेचने की तैयारियां कर ली है। इससे कमजोर तबके के बच्चे शिक्षा से पूरी तरह से वंचित हो जाएंगे।
- अर्जुन लोमरोड, जिलाध्यक्ष, शिक्षक संघ शेखावत
Anonymous

Anonymous

Powered by Blogger.