हिण्डौनसिटी.
तेज गर्मी और लू के थपेड़े आमजन की सेहत पर भारी पड़ रहे हैं। तपती धरती और आसमां आग के मानिंद झुलसाती धूप से क्षेत्र में गर्मीजन्य बीमारियों ने पैर पसार लिए हैं।
गर्मी का कहर बढऩे के साथ ही राजकीय चिकित्सालय में रोगियों की संया बढ़ गई है। आउटडोर का आंकड़ा डेढ़ हजार को पार कर रहा है। वहीं भर्ती अस्पताल के पलंग क्षमता से दो गुणी से अधिक है। ऐसे में चिकित्सालय में पलंगों की क्षमता अनुरूप सरकार द्वारा स्थापित चिकित्सा सेवाएं एवं संसाधन बौने पड़ रहे हैं। स्थिति यह है कि ओवरलोड वार्डों में रोगियों को त्वरित उपचार लेने के लिए अन्य से 'पहले मैंÓ को लेकर जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
उपजिला श्रेणी के जिले का दूसरे बड़े अस्पताल की क्षमता १२५ पलंगों की है। आधा दर्जन से अधिक वार्डों में रोगियों को भर्ती कर उपचार किया जाता है। गर्मी बढऩे के साथ ही क्षेत्र में रोगियों आवक बढऩे से आउटडोर से लेकर वार्डों तक की व्यवस्था कमतर होने लगती है। दो सप्ताह से पारे के ४५ सैल्सियस पर पहुंचने से अस्पताल में क्षमता से कई गुणा रोगियों की आवक व दुगनी से अधिक भर्ती हो रही है। स्थित यह है कि दो दर्जन पलंग क्षमता वाले वार्डों में चौबीस घंटे में सौ से अधिक रोगी भर्ती हो रहे हैं।
कतार में इंतजार, कैसे हो त्वरित उपचार
दो पारियों के आउटडोर में हर रोज डेढ़ हजार से अधिक रोगियों की आवक हो रही है। इससे चिकित्सालय में चहुंओर भीड़ भरे हालात हैं। रोगियों को मुय द्वार में घुसते ही कतार और इंंजतार के दौर से गुजरना पड़ता है। आउट डोर में दो दर्जन से अधिक चिकित्सक विभिन्न कक्षों में बैठते हैं। कमोबेश हर चिकित्सक के कक्ष में रोगियों की कतार का आलम रहता है। सबसे ज्यादा भीड़ फिजीशियन व शिशुरोग की आउटडोर में रहती है।
ओवरलोड वार्ड पलंगों की दरकार
चिकित्सालय सूत्रों के अनुसार जिले में सर्वाधिक आउटडोर होने से मौसमी बीमारी के दौर में भर्ती से दुगने आंकड़े को पार कर जाती है। एक पलंग पर दो रोगियों को भर्ती कर उपचार करना पड़ता है। ऐसे में चिकित्सालय में पलंग क्षमता में क्रमोन्नति की जरुरत है।
एमओटी में इंजेक्शन के लिए मारामारी
आपात स्थिति में रोगी के प्रथम परीक्षण के लिए स्थापित मिनी ऑपरेशन थियेटर (एमओटी) में आउटडोर पारी में इंजेक्शन के लिए मारामारी का आलम रहता है। इस बीच दुर्घटना एवं अन्य इमरजेंसी केस आने पर इंजेक्शन लगाने के कार्य प्रभावित हो जाता है। आउटडोर में रोगियों के भरमार के बाद रात्रिकालीन इमरजेंसी पारी में भी कतार रही है। रात आठ बजे से सुबह आठ बजे तक की १२ घंटे की रात्रिकालीन पारी में सामान्य तय रात एक बजे तक रोगियों की आवक रहती है।
रात में एक कपाउण्डर के भरोसे वार्ड
रोगियों की आवक के मुताबिक नर्सिंगकर्मी नहीं है। ऐसे में रात की पारी में वार्डों में भर्ती रोगियों के उपचार का भार एक कपाउण्डर पर रहता है। मौसमी बीमारियों के सीजन मे रात में वार्डों के ओवरलोड होने से एकमात्र नर्सिंगकर्मी कोभागदौड़ करनी पड़ती है। जबकि सुबह व दिन की पारी में दो-दो नर्सिंग कर्मी कार्यरत हैं।
ऑफ में कटौती कर संभाल रहे व्यवस्था
इन दिनों रोगियों की संया सामान्य से चौगुनी है। सीमित संसाधनों में स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रखने के लिए चिकित्साकर्मियों के साप्ताहिक अवकाश में कटौती की गई है।
डॉ. नमोनारायण मीणा, पीएमओ, राजकीय चिकित्सालय, हिण्डौनसिटी।





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