जयपुर। राज्य सरकार द्रव्यवती नदी प्रोजेक्ट को 15 अगस्त तक पूरा करने की योजना के साथ काम कर रही है। इसके लिए द्रव्यवती नदी प्रोजेक्ट के दायरे में आ रही जमीन को बिना मुआवजा दिए ही किसानों से ले लिया गया है। बिना मुआवजा दिए जमीन लेने से गोनेर सहित जयपुर के द्रव्यवती नदी प्रभावित इलाके के किसानों में आक्रोश फैल गया है।
मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलन कर रही द्रव्यवती नदी पीड़ित किसान संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री के जनसुनवाई कार्यक्रमों का विरोध करने का फैसला लिया है। किसानों ने तय किया है कि खातेदारी जमीनों के बदले मुआवजा नहीं मिलने तक मुख्यमंत्री का जहां कहीं भी जनसुनवाई कार्यक्रम होगा, पीड़ित किसान अपनी मांग को लेकर वहीं पहुंच जाएंगे। जब तक सरकार उनकी मांग नहीं मानती जनसुनवाई कार्यक्रम का विरोध किया जाएगा। किसानों ने सांसद रामचरण बोहरा से मुलाकात की थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
किसान कर चुके हैं सदबुद्धि यज्ञ
गौरतलब है कि किसान सरकार के लिए सदबुद्धि यज्ञ कर चुके हैं। द्रव्यवती नदी पीड़ित किसान संघर्ष समिति के संयोजक अशोक मेहता ने बताया कि अपने हक की मांग को लेकर किसान सांसद, विधायक, मंत्री और जेडीए अधिकारियों से मिल चुके हैं। लेकिन कहीं भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। अब मुख्यमंत्री तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए उनके जनसुनवाई कार्यक्रम में विरोध जताने का फैसला किया गया है।
किसान डेढ़ साल से लगा रहे हैं गुहार
द्रव्यवती नदी प्रोजेक्ट से प्रभावित जयपुर के किसान पिछले डेढ़ साल निजी खातेदारी जमीनों के बदले मुआवजे की मांग सरकार और सरकारी महकमों से कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि सरकार ने अपने बल का दुरुपयोग करते हुए निजी खातेदारी जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया और प्रोजेक्ट का काम शुरू करवाया दिया। किसानों का कहना है कि नगरीय विकास मंत्री और स्थानीय सांसद रामचरण बोहरा के बार-बार आश्वासन के बावजूद सरकार की मंशा अभी तक मुआवजा देने की नजर नहीं आती। इसलिए किसानों ने तय किया है कि मुख्यमंत्री जब तक द्रव्यवती नदी पीड़ित किसानों को मिलने का समय नहीं देती है और किसानों की पीड़ा दूर नहीं करती है। तब तक प्रदेश में जहां भी मुख्यमंत्री का जनसुनवाई कार्यक्रम होगा, वहीं, जाकर किसान अपनी पीड़ा और समस्या मुख्यमंत्री को बताएंगे। जमीन छीन लेने से किसान बदहाली और बेरोजगारी के हालात में पहुंच गए हैं। संघर्ष समिति के संयोजक अशोक मेहता, जगदीश शर्मा, हरिराम सैनी, शंकर शर्मा, रामनिवास शर्मा, औंकार सैनी, राष्ट्रीय मानव अधिकार परिषद् के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेन्द्र तांबी, जगदीश राजवंशी, मानसिंह मीणा, रामकिशन मीणा, नाथूराम सैनी सहित अनेकों किसान अपने हक के लिए आंदोलन कर रहे हैं।





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