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जाने-अंजाने में आप कहीं कैंसर डाइट तो नहीं ले रहे

इसे विडंबना नहीं तो और क्या कहेंगे कि कभी कैंसर जैसी बीमारी केवल फिल्मों में ही दिखाई देती थी। आज यही बीमारी हर तीसरे आदमी को होने लगी है। क्या इसके लिए हमारा खानपान तो जिम्मेदार नहीं? कुछ भी हो लेकिन यह जरूर है कि हम जाने-अंजाने में ऐसी वस्तुओं का इस्तेमाल कर रहे हैं जो कि ना चाहते हुए भी हमें कैंसर जैसी घातक बीमारी की ओर धकेल रही है। गौरतलब है कि इनमें से ज्यादातर चीजें आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी हुई हैं।

फल और सब्जियां
गंदे नालों के पानी से सब्जी-फल पैदा किए जा रहे हैं। अच्छी पैदावार के लिए इनसेक्टिसाइडस, पेस्टीसाइडस और केमिकल फर्टिलाइजर्स का अत्यधिक इस्तेमाल हो रहा है। डीडीटीए नाइट्रेट और फास्फेट खेतों में डाला जा रहा है। ये सब कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं।

डिटर्जेंट और कीड़े-मकौड़े की दवा
इनमें अल्काइल फिनोल, ट्राईक्लोसन और टेट्राक्लोरोएथलिन रसायन हैं। ये हारमोन और एन्डोक्राइन सिस्टम को प्रभावित करते है और हार्मोन का संतुलन बिगाड़ देते हैं। इस रसायनों से ब्रेस्ट और प्रोस्टेट केंसर का खतरा बढ़ जाता है।

कैन पैक्ड वस्तुएं
कैन में विसफिनल प्लास्टिक की परत होती है। इसमें मौजूद बीपीए हार्मोस के असंतुलन से ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। बीपीए से बांझपन और पोली सिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम भी हो सकता है।

सौदर्य प्रसाधन
पावडर, बॉडी लोशन, लिपस्टिक, डियोड्रेन्ट और स्प्रे आदि ट्राइक्लोसन, पराबेन्स जैसे रसायनों से बनते हैं जो हार्मोन्स को प्रभावित करते हैं और कैंसर की आशंका बढ़ाते हैं।

माइक्रोवेव ओवन
माइक्रोवेव से पका या गरम किया गया खाना लम्बे समय तक खाने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है हालांकि इस तथ्य पर शोध हो रहा है।

नॉन स्टिक बर्तन
इन बर्तनों की कोटिंग से कम तेल से खाना अवश्य पक जाता है पर यह कोटिंग पोली टेट्राफ्लुरोएथलीन से की जाती है। एनवायरोमेंट वर्किंग गु्रप के अनुसार नॉन स्टिक बर्तनों की कोटिंग कैंसर की आंशका बढ़ाती है। नॉन स्टिक बर्तनों से निकलने वाला धुआं गर्भवती महिलाओं के लिए नुकसानदेय है और रोग प्रतिरोधक क्षमता घटाता है।



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