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मृतक शिक्षक को पदोन्नति, आदेश में कहा, बाखासर जाओ

 

 

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दिलीप दवे
बाड़मेर. जिस शिक्षक का देहांत एक साल पहले हो चुका था, उसके घर शिक्षा विभाग ने आदेश भेजा। इस आदेश में बात यह थी कि उनकी पदोन्नति हो गई और द्वितीय श्रेणी शिक्षक बन गए। जबकि जिनको आदेश मिलना था, वे अब इस दुनिया में नहीं रहे। दरअसल डीपीसी के तहत हाल में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने तृतीय श्रेणी शिक्षकों को द्वितीय श्रेणी में पदेान्नत किया है। इसमें अंग्रेजी के वरिष्ठ शिक्षकों की पांचवीं सूची में शिक्षक सुखवीरसिंह को भी आदेश भेजा, जिनका देहांत 21 मार्च 2017 को हो चुका है।

शिक्षा विभाग में इन दिनों सब कुछ ऑनलाइन होने के बावजूद मृतक शिक्षक को पदोन्नति देने का मामला सामने आया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग में चल रही डीपीसी की काउंसलिंग प्रक्रिया के बाद पदोन्नति के साथ स्थानांतरण आदेश जारी किए गए हैं। मण्डल उप निदेशक जोधपुर ने इसमें तृतीय श्रेणी शिक्षक राउप्रावि सुखवीरसिंह को वरिष्ठ अध्यापक अंग्रेजी विषय के पद पर नियुक्त करते हुए राउमावि बाखासर ब्लॉक सेड़वा में लगाया है। शिक्षक का पांचवीं सूची में 101वें स्थान पर नाम है। जबकि अध्यापक सुखवीरसिंह का निधन 2017 में हो गया था। बावजूद इसके उनका तबादला कर दिया।
शाला दर्पण के बाद भी यह स्थिति

गौरतलब है कि माध्यमिक शिक्षा के तहत आने वाले विद्यालयों का पूरा विवरण शाला दर्पण के तहत ऑनलाइन है। इसमें सूचनाएं हर माह अपडेट होती है। एेसे में सुखवीरसिंह के देहांत के बाद विद्यालय में शाला दर्पण से उनका नाम हट चुका है। बावजूद इसके काउंसलिंग के बाद उनको पदोन्नति देना विभागीय कार्मिकों की लापरवाही को दर्शाता है।
सवाल मांग रहे जवाब

डीपीसी से पहले शिक्षकों की काउंसलिंग भी होती है। जिसमें शिक्षकों को डीपीसी के बाद विद्यालय चयन का मौका दिया जाता है। इसके चलते सवाल यह भी है कि क्या काउंसलिंग में गए बिना ही सुखबीरसिंह को पदोन्नति दे दी गई।
वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट भी

शिक्षा विभाग हर शिक्षक की वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट भी लेता है। एेसे में जब संबंधित शिक्षक का निधन हो चुका है तो यह रिपोर्ट कैसे पहुंची। इस रिपोर्ट के आधार पर ही पदोन्नति सहित अन्य परिलाभ भी देय होते हैं।
होनी चाहिए कार्रवाई

-यह तो लापरवाही की इंतहा ही है। क्योंकि शिक्षकों की पदोन्नति से पूर्व वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट मांगी जाती है और शिक्षक को काउंसलिंग के माध्यम से पोस्टिंग दी जाती है। एेसे में मृतक के पदोन्नति आदेश समझ से परे है। विभाग जांच करवा दोषी कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई करें।- बसंतकुमार जांणी, जिलाध्यक्ष राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ (रेस्टा) बाड़मेर

 



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