बाड़मेर . रासायनिक खाद के अधिक उपयोग से थार की मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है। कई पोषक तत्वों की कमी के चलते हालात चिंताजनक हैं। इससे उपज पर असर के साथ लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। जिले में मिट्टी के नमूनों की जांच में 95 प्रतिशत जिंक, 80 प्रतिशत आयरन तथा 70 प्रतिशत जैविक कार्बन की कमी पाई गई है।
कार्ड में मिलती है मिट्टी की सेहत की जानकारी
जिले की प्रयोगशालाओं में मिट्टी-पानी की जांच के बाद जमीन के प्रत्येक खातेदार को सॉयल हैल्थ कार्ड जारी किया जाता है। कार्ड में मिट्टी की सेहत से संबंधित पूरी जानकारी दी जाती हे। इसमें कौनसे पोषक तत्व कम है, मिट्टी का उपचार तथा फसल को लेकर सम्पूर्ण जानकारी शामिल होती है। जिले में मार्च 2018 तक कुल 2,11,501 सॉयल हैल्थ कार्ड जारी किए गए हैं।
सात दिन में मिलता है कार्ड
किसान खेत के पानी और मिट्टी की जांच करवाने के लिए प्रयोगशाला में नमूने भिजवा सकते हैं। जांच के लिए 10 रुपए देने होते हैं। प्रयोगशाला तक नमूने पहुंचाने के बाद 7 दिन के भीतर सॉयल हैल्थ कार्ड जारी हो जाता है।
जिले में प्रयोगशालाएं
-बाड़मेर
-बालोतरा
-केवीके दांता
-गुड़ामालानी।
देसी खाद सबसे अधिक उपयोगी
जानकारों के अनुसार मिट्टी में रसायनों का प्रयोग बढऩे से जैविक कार्बन, जिंक एवं आयरन की मुख्यत: कमी पाई गई है। इनकी पूर्ति के लिए देसी खाद सबसे उपयोगी है। वहीं जिंक के लिए जिंक सल्फेट, क्षारीय भूमि के लिए जिप्सम प्रयोग की सलाह दी जाती है। जिप्सम के लिए सरकार 50 प्रतिशत अनुदान भी दे रही है ।
ज्यादा होने पर भेजते हैं जयपुर
जिले में मार्च 2018 तक कुल 2,11,501 सॉयल हैल्थ कार्ड जारी किए हैं । जिले की चार प्रयोगशालाओं में मिट्टी-पानी का परीक्षण किया जा रहा है। यहां ज्यादा नमूने होने पर केंद्रीय प्रयोगशाला जयपुर भी भेजे जा रहे हैं ।
-धीरेंद्र सिंह, कृषि अनुसंधान अधिकारी (रसायन) बाड़मेर





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