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अच्छी खबर: एनएचएआई से मिलेंगे 200 करोड़, अब जेडीए खरीदेगा जमीन

राजधानी जयपुर के ड्रीम प्रोजेक्ट में आई जमीन की बाधा दूर होने की उम्मीद बंधी है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने जयपुर विकास प्राधिकरण को 200 करोड़ रूपए उधार देने को मंजूरी दे दी है। अब जेडीए इस राशि से क्लोअर लीफ स्ट्रक्चर के लिए जमीन खरीदेगा। जेडीए को एनएचएआई से यह राशि जल्द ही मिलने की उम्मीद है।

350 करोड़ में से 200 करोड़ मांगे थे उधार
गौरतलब है कि रिंग रोड प्रोजेक्ट के पेटे जेडीए को एनएचएआई से 35 करोड़ रूपए सालाना के हिसाब से 10 साल में 350 करोड़ रूपए मिलने हैं। जेडीए ने अप्रेल 2018 में इन्हीं 350 करोड़ रूपए में से 200 करोड़ रूपए एनएचएआई से उधार मांगे थे। एनएचएआई ने जेडीए का प्रस्ताव शहरी विकास मंत्रालय को भिजवाया था। वहां से मंजूरी मिलने के बाद अब जेडीए को 200 करोड़ रूपए मिलेंगे। इस राशि से जेडीए रिंग रोड परियोजना में प्रस्तावित क्लोअर लीफ स्ट्रक्चर के लिए जमीन खरीदेगा।

एमओयू के बाद पता चला जमीन ही नहीं
जानकारी के अनुसार एनएचएआई ने अगस्त 2017 में जेडीए के साथ मेमोरेंडम आॅफ अंडरस्टेंडिंग साइन किया था। एमओयू के बाद जब एनएचएआई ने रिंग रोड के लिए टेंडर करना शुरू किया तो पता चला कि रिंग रोड को हाईवे कनेक्ट करने वाली तीन जगहों पर फ्लॉवर लीफ स्ट्रक्चर बनने हैं, वहां पर अभी जमीन अवाप्त नहीं की गई। भूमि अवाप्ति नहीं होने के कारण एनएचएआई को बड़े स्ट्रक्चर्स के टेंडर रोकने पड़े। एनएचएआई की संवेदक फर्म गावर फिलहाल तीनों बड़े स्ट्रक्चर्स के काम को छोड़कर बीच के हिस्से और दूसरे निर्माण कार्य कर रही है।

यहां बनने हैं फ्लॉवर लीफ स्ट्रक्चर
एनएचएआई इंजीनियर्स के मुताबिक रिंग रोड के आगरा रोड स्थित स्टार्टिंग प्वाइंट बगराना में रिंग रोड के ट्रेफिक को हाईवे पर लाने और हाईवे के ट्रेफिक को रिंग रोड पर लाने के लिए फ्लॉवर लीफ स्ट्रक्चर बनना है। ऐसे ही स्ट्रक्चर टोंक रोड पर शिवदासपुरा और अजमेर रोड पर मौजमाबाद—अखेपुरा के नजदीक बनने हैं। लेकिन जेडीए ने अब तक तीनों में से एक भी जगह के लिए जमीन अवाप्त नहीं की है।

क्या है फ्लॉवर लीफ स्ट्रक्चर्स
जानकारी के अनुसार राजमार्गों के यातायात को बिना किसी ट्रेफिक सिग्नल पर रोके सीधे ही हाईवे पर लाने की तकनीक वाले निर्माण को फ्लॉवर लीफ स्ट्रक्चर कहते हैं। जब दो बड़ी सड़कों के ट्रेफिक को बिना रोके एक से दूसरी रोड पर लाया जाता है, तो इसके लिए जो ढांचा बनता है, उसका डिजाइन फूल की पत्तियों की तरह का हो जाता है। इसलिए इन स्ट्रक्चर्स को फ्लॉवर लीफ स्ट्रक्चर कहा जाता है। इस तकनीक में ट्रेफिक लाइट की बजाय ऐसी घूमावदार सड़क बनाई जाती है, जो किसी भी साइड के यातायात को रोके बिना एक रोड के ट्रेफिक को दूसरे में मर्ज कर देती है।

वर्जन
एनएचएआई ने जेडीए को 200 करोड़ रूपए देने की सहमति दे दी है। जल्द ही यह राशि जेडीए को मिल जाएगी। जेडीए जब भी जमीन उपलब्ध करवाएगा, रिंग रोड के क्लोअर लीफ स्ट्रक्चर बनना शुरू हो जाएंगे।
अजय विश्नोई, निदेशक रिंग रोड प्रोजेक्ट, एनएचएआई

 



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