नर्इ दिल्ली। भारत में रहने वाले लोगों को लिए बुरी खबर है। एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि आने वाले 12 वर्षों तक कमर्चारियों के मेहनताना में किसी तरह का कोर्इ इजाफा नहीं होगा। वैसे स्टडी में इस बात की भी पुष्टी हुर्इ है कि भारत के कर्मचारी दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले ज्यादा टैलेंटिड हैं। आइए आपको भी बताते हैं कि स्टडी रिपोर्ट में आैर क्या चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।
इस स्टडी में हुए चौंकाने वाले खुलासे
भारत दुनिया की एकलौती अर्थव्यवस्था होगी, जिसमें साल 2030 तक मेहनताना में इजाफा नहीं होगा। एक स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक भारत में टैलेंटेड लोगों की भरमार है जबकि वैश्विक स्तर पर स्थिति इसके उलट है। स्टडी में पाया गया है कि अन्य देशों की तुलना में भारत के पास साल 2030 तक प्रतिभावान लोगों की संख्या जरूरत से अधिक होगी। कॉर्न फेरी की ''द सैलरी सर्ज'' नामक स्टडी में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर, अत्यधिक कुशल कर्मचारियों की कमी की वजह से 2030 तक ऐसे लोगों का वेतन अधिक हो सकता है। यह वर्ष 2030 तक दुनिया भर के संगठनों के लिए वार्षिक श्रम लागत में 2.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का इजाफा कर सकता है।
इन सालों में श्रमिकों की सबसे ज्यादा मांग
इस स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़ी अर्थव्यवस्थाएं जैसे कि अमेरिका, चीन और जर्मनी तेजी से कर्मचारी लागत बढ़ने की स्थिति का सामना कर सकती हैं। ग्लोबल टैलेंट क्रंच ने शोध में पाया है कि भारत समेत दुनिया के 20 प्रमुख बाजारों में श्रमिकों की वैश्विक मांग के लिए साल 2020, साल 2025 और साल 2030 के तीन माइलस्टोन हैं, जो कि तीन प्रमुख सेक्टर वित्तीय एवं बिजनेस सर्विस, तकनीक और मीडिया एवं टेलिकम्युनिकेशंस (टीएमटी) एंड मैन्युफैक्चरिंग हैं। वैश्विक रूप से अमेरिकी कंपनियों को उम्मीद है कि उसे 531 बिलियन डॉलर के साथ इस मुश्किल का सबसे ज्यादा सामना करना पड़ेगा। वहीं एशिया पैसिफिक में सैलरी में इजाफा साल 2030 तक सालाना पैरोल में 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक का इजाफा हो सकता है।





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