नर्इ दिल्ली। 8 मर्इ 2016 को नोटबंदी के बाद से अभी तक लगातार उसके असर को लेकर चर्चा हाे रही है। कुछ आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि नोटबंदी से देश के अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ा है वहीं अन्य लोग इस बात से सहमत है कि नोटबंदी से देश के अर्थव्यवस्था पर साकारात्मक असर पड़ा है आैर इससे कालेधन पर राेक लगाने में मदद मिली है। नोटबंदी के बाद देश में करीब 73,000 छोटी-बड़ी कंपनिनयों ने कुल 24,000 करोड़ रुपए बैंकोें में वापस जमा कराए हैं। ये वो कंपनियां हैं जिन्हें नोटबंदी के बाद रजिस्ट्रेशन कंपनी रजिस्ट्रार ने रद्द कर दिया था। इस बात को सरकार ने नोटबंदी के बाद बैंकों में जमा राशि को लेकर एक डेटा में बताया है। बता दें कि कालेधन पर रोकथाम आैर अवैध एवं बेनामी संपत्ति पर शिकंजा कसने के लिए काॅर्पोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री ने 2.26 लाख कंपनियों के रजिस्ट्रेश को रद्द कर दिया था।
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2.26 लाख कंपनियों के रद्द हुए थे रजिस्ट्रेशन
रद्द किए गए अधिकतर कंपनियों पर अवैध रूप से फंड जुटाने आैर हेराफेरी करने का आरोप है। मंत्रालय ने जिन 2.26 लाख कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया है उसमें से 1.68 लाख कंपनियों के खाते में नोटबंदी के बाद नकदी जमा किए गए थे। मंत्रालय ने अपने तरफ से जारी किए गए दस्तावेजों में कहा है कि, 'जिन कंपनियों ने बैंक में नकदी जमा कराया है, उनमें से 73,000 कंपनियों ने अपने खाते में कुल 24,000 करोड़ रुपए जमा कराए हैं। मंत्रालय ने ये जानकारी अलग-अलग बैंकों से जुटाया है।'
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सरकार के पास रजिस्ट्रेशन रद्द करने का अधिकार
मंत्रालय ने बीते चार साल के कामकाज को लेकर एक दस्तावेज जारी किया है जिसमें ये बताया गया है कि, फिलहाल एेसी 68 कंपनियों के खिलाफ जांच की प्रक्रिया जारी है। इनमें से 19 कंपनियों की जांच सीरियस फ्राॅड इन्वेस्टीगेशन आॅफिस कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ इनमें से 49 कंपनियों के बारे में रजिस्ट्रार आॅफिस विस्तृत जानकारी जुटा रहा है। आपको बता दें कि कंपनी एक्ट के तहत सरकार के पास ये अधिकार है कि वो सरकार विभिन्न आधारों को ध्यान में रखते हुए कंपनियों के रजिस्ट्रेशन को किसी भी वक्त रद्द कर सकती है।





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