श्रीगंगानगर.
जिला स्थायी लोक अदालत के आदेश के बावजूद कैटल फ्री सिटी नहीं होने पर अब जिला प्रशासन ने संबंधित फाइल नगर परिषद से मांगी है।
अदालत ने तीन महीने में शहर में घूम रहे आवारा पशुओं को पकडऩे का आदेश किया था, लेकिन परिषद प्रशासन ने खानापूर्ति करते हुए यह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। पिछले दिनों शिकायतकर्ता अधिवक्ता राधेश्याम गोयल ने न्यायालय की अवमानना के संबंध में याचिका दायर कर जिला कलक्टर, नगर परिषद आयुक्त, सभापति, यूआईटी अध्यक्ष, डीटीओ और ट्रैफिक इंचार्ज से साठ हजार रुपए की वसूली की मांग की थी।
इस मामले को सैशन जज के सुपुर्द किया जा चुका है। इस बीच जिला प्रशासन ने न्यायालय की अवमानना संबंधित याचिका में अपना पक्ष रखने के लिए नगर परिषद प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है।
बजट का है अभाव
उधर, परिषद प्रशासन का कहना है कि राज्य सरकार ने आवारा पशुओं के संबंध में एक रुपया भी बजट में नहीं दिया है। इस कारण पशुओं की धरपकड़ की मुहिम रोक दी गई है।
श्रीगंगानगर.
शहर को कैटल फ्री करने के लिए नगर परिषद की तरफ से हर माह लाखों रुपए का अनुदान गोशालाओं को दिया जाता है, साथ ही खुद भी नंदीशाला का संचालन कर रही है। फिर भी शहर में पशुओं का जमावड़ा सड़कों पर हर जगह देखा जा सकता है। यूआईटी के पास, बीरबल चौक सब्जी मंडी, सुखवंत सिनेमा के पास सहित कलक्ट्रेट रोड पर भी पशुओं का शुक्रवार को जमावड़ा लगा रहा। सड़कों पर घूम रहे पशुओं से हर समय हादसों का खतरा बना रहता है। कई माह पहले हनुमानगढ़ रोड पर गोधे की टक्कर से एक बाइक सवार बुजुर्ग की मौत हो गई थी। इसके बाद सक्रिय हुए प्रशासन ने शहर में घूम रहे पशुओं को पकड़कर गोशालाओं और नंदीशाला में भेजने का आदेश दिया था परन्तु अब फिर शहर के मुख्य चौक-चौराहों में आवारा पशुओं की भरमार
हो गई है।





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