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अलवर में बिजनेस का बदल रहा ट्रेंड, अब शूकर पालन सीख रहे सभी जाति के युवा

अलवर परिवर्तन के दौर में परम्परागत रूप से एक जाति विशेष के लोगों का एक व्यवसाय करने का ट्रेंड बदलता जा रहा है। शूकर पालन का काम पहले एक ही जाति वाल्मीकि के लोग करते थे। अब शूकर पालन का प्रशिक्षण प्रदेश के कई जिलों के युवा अलवर में लेने आ रह ेहैं। अलवर में प्रदेश का एकमात्र शूकर प्रशिक्षण केन्द्र हैं।
प्रदेश में यह बीते पांच सालों में युवाओं की मानसिकता में परितर्वन के कारण संभव हो सका है। यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर युवा कई जिलों में शूकर फार्म खोलकर इसे व्यवसाय के रूप में अपना रहे हैं। प्रशिक्षित युवा विदेशों से अच्छी नस्लों वाले शूकर को विकसित कर उन्हें निर्यात भी कर रहे हैं जिनकी खूब मांग है।
राजस्थान का एक मात्र प्रशिक्षण केंद्र अलवर में
राजस्थान का एकमात्र शुकर पालन प्रशिक्षण केंद्र अलवर में ही संचालित किया जाता है। यहां राज्य भर से युवा शूकर पालन का प्रशिक्षण लेने के लिए आते हैं। प्रशिक्षण ले चुके युवाओं में अब सामान्य जाति के युवा भी बढ़ चढ़कर भाग लेने लगे हैं। एक बैच में 100 युवाओं में से अब 25 से 30 युवा सामान्य जाति के हैं।

...फिर भी आ रहे एमटेक तक

शूकर पालन के प्रशिक्षण के लिए कोई शैक्षिक योग्यता आवश्यक नही है। । बीते वर्षों में यहां प्रशिक्षण लेने वालों में बीए, एमए के अलावा बीटेक , एमटेक पास ,एमसीए शिक्षा प्राप्त है। जो प्रशिक्षण के बाद अपना स्वरोजगार शुरु कर स्वयं तो आत्मनिर्भर हो ही रहे हैं अब दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं। यहां तीन किस्मों के शूकरों का रखने का प्रशिक्षण दिया जाता है जिनमें लार्ज व्हाइट यार्क शायर, मीडिल व्हाइट यार्क शायर, देसी क्रॉस ब्रीड शामिल है।

यह हैं तथ्य-
वर्ष 2017 में दिसंबर माह के प्रशिक्षण में एससी के 6 ओबीसी के 15 सामान्य वर्ग के 5 प्रशिक्षणार्थी शामिल हुए।
वर्ष 2018 में 12 फरवरी माह के प्रशिक्षण में एससी के 8, ओबीसी के 9 , सामान्य वर्ग के 9 प्रशिक्षणार्थी शामिल हुए।
वर्ष 2018 में 22 फरवरी से 24 फरवरी तक एससी के 14, ओबीसी के 6, जनरल के 6 प्रशिक्षणार्थी ।
वर्ष 2018 में 13 मार्च से 16 मार्च तक एस सी के 3, ओबीसी के 13, सामान्य वर्ग के 10 प्रशिक्षणार्थी ।

कम लागत, कम मेहनत का व्यवसाय

राजस्थान का एकमात्र शूकर प्रजनन केंद्र हैं। यहां पर राज्यभर से लोग प्रशिक्षण के लिए आते हैं। शूकर साल में दो बार प्रजनन होता है। इसकी वृद्धिदर 16 से 18 गुना होती है । इसका मांस बहुत महंगा बिकता है। कम समय, कम मेहनत में यह अच्छा व्यवसाय होता है।
महावीर सिंह चौधरी, उपनिदेशक, शूकर प्रजनन केंद्र, अलवर



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