सवाईमाधोपुर. तेखी धूप सिर्फ लोगों को ही परेशान नहीं कर रही है। इससे उर्वरकता कम हो रही है, जिसका सीधा असर खरीफ की फसलों की बढ़वार और उत्पादकता पर पड़ेगा।पिछले कुछ सालों में मई से जून तक तापमान लगातार 45 डिग्री के आस-पास रहने से मिट्टी उपजाऊ परत से 55 प्रतिशत नाइट्रोजन नष्ट हो गई है।
यह चौंकाने वाला खुलासा मृदा जांच प्रयोगशाला में जिलेभर से आने वाले मिट््टी के नमूनों से हुआ है।55 प्रतिशत नमूनों में नाइट्रोजन की मात्रा 0.5 प्रतिशत से कम पाई गई है। इसके चलते खेतों में फसलों को बचाने के लिए किसानों को यूरिया, जैविक खाद व अन्य रसायन का प्रयोग करना पड़ रहा है। कृषि वैज्ञानिकों की माने तो नाइट्रोजन की कमी से फसलों की पैदावार में कम आती है।
तीन तरह से होता है आकलन
मिट्टी में 0.5 प्रतिशत नाइट्रोजन होने का मतलब है कि उसमें नाइट्रोजन न के बराबर है। इस स्थिति में मृदा में यूरिया या अन्य अन्य जैविक खाद की आवश्यकता पड़ती है। अगर मिट््टी में यही स्थिति रहती है, तो फसलों का बढऩा रूक जाता है। बीज आने से पहले ही फसल पकाने वाली स्थिति में आ जाती है। इसी प्रकार मिट््टी में अगर नाइट्रोजन की मात्रा 7.5 तक आती है, तो इसका मतलब है कि मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा का आंकड़ा मध्यम है। इस स्थिति में खेत में खड़ी फसलों की गुणवत्ता में कमी आएगी। साथ ही फसल उचित ऊंचाई व बीज पूरा रूप नहीं ले पाएगा।
ये उपाय जरूरी
खेत की मिट्टी में नाइट्रोजन की परत को बनाए रखने के लिए किसानों को बुवाई के समय गहरा हल चलाना चाहिए। यूरिया के स्थान पर खेतों में नाइट्रोजन का लेवल बढ़ाने के लिए गोबर, फसल व घास का अपशिष्ट व फसल चक्र को अपनाना चाहिए। किसानों को जैविक खेती को अपनाना चाहिए।
किशनलाल गुर्जर, कृषि अनुसंधान अधिकारी(रसायन) सवाईमाधोपुर
खेतों में सबसे कम पाया नाइट्रोजन
जिलेभर में आने वाली मिट््टी के नाइट्रोजन की मात्रा को तीन चरणों में बांटा गया है। यह तीन चरण 0.5 प्रतिशत, 7.5 प्रतिशत व 7.5 प्रतिशत से ऊपर है। पहाड़ी क्षेत्रों में मिट््टी के नमूनों में नाइट्रोजन की मात्रा 7.5 प्रतिशत के अंदर पाई गई है। वहीं जिले के अधिकतर खेतों में नाइट्रोजन की मात्रा 0.5 प्रतिशत मिली है।
अब तक साढ़े 16 हजार नमूने लिए
मिट््टी परीक्षण प्रयोगशाला अधिकारियों की ओर से अब तक जिले की सभी ब्लॉकों से 16 हजार 437 नमूने लिए हैं। इस दौरान सवाईमाधोपुर, खण्डार, बौंली, बामनवास, चौथकाबरवाड़ा, गंगापुरसिटी में मिट्टी के नमूनों में नाइट्रोजन की कमी मिली।
ये होता है नाइट्रोजन का फायदा
यह सभी जीवित ऊतकों की यानि, जड़, तना, पत्ती की वृद्धि और विकास में सहायक है। क्लोरोफिल, प्रोटोप्लाजमा, प्रोटीन व न्यूक्लिक
अमलों का एक महत्वपूर्ण अव्यव है। इससे पत्ती वाली सब्जियों व चारे की गुणवत्ता में सुधार करता है।
पिछले पांच सालों में 3 जून का औसत तापमान
वर्ष अधिकतम न्यूनतम
2014 43.8 28.0
2015 40.7 25.4
2016 45 30.2
2017 41 31
2018 46.5 30.8





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