जालोर. जिस सड़क पर सालभर तक वाहन हिचकोले खाते रहे।गत वर्षकी भारी बारिश के बाद भी केवल दिखावे की मरम्मत की गई उस पर इस बार बारिश से ऐन पहले डामरीकरण करवाया गया है।मानसून सिर पर होने के बावजूद पीडब्ल्यूडी ने इसमें लाखों का बजट खर्च कर दिया।यह हाल जालोर को सिरोही सेजोडऩे वाली मुख्य सड़क का है। जिला सीमा पर वराड़ा गांव के समीप सेरायपुरिया गांव तक करीब ढाई किमी व इसके बाद सियाणा गांव में सड़क के एक टुकड़े पर डामरीकरण किया गया है।
हालांकि सड़क के इस हिस्से से गुजरते हुए लोगों को फिलवक्त जरूर राहत मिल रही है, लेकिन बारिश के साथ ही यह उखडऩे का अंदेशा बना हुआ है।
वैसे सीमा से आकोली गांव में टोल रोड तक सालभर में दो बार मरम्मत करवाई गई, लेकिन मरम्मत के नाम बजट उठने के बावजूद ठोस काम नहीं हो पाया। करीब २१ किमी की यह सड़कलोगों के लिए दुखदायी बनी रही। जिला सीमा से रायपुरिया गांव तक की सड़क पूरी तरह बिखरी हुई थी। गत वर्ष बारिश के बाद इस पर पैबंद भी लगाए गए, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा।
कागजों में दर्शाई थी चमाचम
सालभर में ही इस सड़क की मरम्मत के लिए दो बार बजट मिल चुका है। एक बार आपदा राहत कार्य के तहत एवं दूसरी बार पेचवर्क केलिए। बीस से बाइस लाख रुपए स्वीकृत किए गए, लेकिन मरम्मत में हर बार औपचारिकता बरती गई। अन्य जिले को जोडऩे वाली मुख्य सड़क होने के बावजूद दोनों ही बार लीपापोती की गई।यहां तक कि कई जगह बड़े गड्ढे भी बगैर मरम्मत किए हीछोड़ दिए। यह दीगर बात रही कि कागजों में यह सड़क चमाचम दिखाई गई।
बजट खपाने का डामरीकरण
स्थिति देखी जाए तो शायद बजट खपाने के लिए ही ऐन वक्त पर डामरीकरण किया गया है।भगवान न करे बारिश में यह सड़क वापस बिखर जाए, लेकिन यदि ऐसा हुआ तो विभागीय कागजों में यही दिखेगा कि यहां हाल ही में सड़क बनाई है। गारंटी अवधि के नाम पर पिछले साल की तरह ही लीपापोती के पैबंद लगाए जाएंगे।औपचारिक मरम्मत में लाखों का बजट कहीं नजर नहीं आएगा।
ठेकेदारों के भरोसे चल रहा काम
माना जा रहा है कि जिम्मेदारों की ठोस मॉनिटरिंग के अभाव में सड़कों की दुर्दशा हो रही है। भारी-भरकम बजट के बावजूद सड़कों की दशा नहीं सुधर रही। सहायक अभियंता स्तर के अधिकारी भी काम के दौरान शायद ही मौके पर खड़े रहते हो। बिना निगरानी के ठेकेदार भी काम के दौरान मनमर्जीचला रहे हैं। अधिकारी इतना भर ही बताते हैं कि मैन पॉवर की कमी के कारण मौके पर खड़े रहना संभव नहीं है।
टेंडर में समय लगा...
सड़क डामरीकरण की स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया की गई।इसमें समय लगता ही है। वर्क ऑर्डर देने के बाद डामरीकरण कार्य किया गया।
-एसएल सुथार, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी, जालोर
तभी तो काम करवाएंगे...
मानसून सिर पर है तो क्या कर सकते है। जिस समय स्वीकृति मिलेगह तभी तो काम करवाएंगे। करीब ढाई किमी तक डामरीकरण करवाया है।
-अनिलकुमार माथुर, एईएन, पीडब्ल्यूडी, जालोर





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