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विदुषी....द वंडर गर्ल

कोटा. असंमभव कुछ नहीं होता, इस बात को एक बार फिर सिद्ध कर दिखाया है एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट की छात्रा विदुषी वार्ष्णेय ने। सामान्यतौर पर विद्यार्थी मेडिकल या इंजीनियरिंग में से एक विषय में कॅरियर चुनकर प्रवेश परीक्षा की तैयारी करते हैं लेकिन यहां विदुषी ने मेडिकल व इंजीनियरिंग की दोनों प्रवेश परीक्षाओं में अच्छी रैंक लाकर श्रेष्ठता सिद्ध की है। छात्रा विदुषी ने वर्ष 2018 में मेडिकल प्रवेश परीक्षा एम्स में ऑल इंडिया रैंक 43 प्राप्त की। यही नहीं इससे पहले सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में 100वी रैंक, जिप्मेर में 44वीं रैंक, इसके साथ ही इंजीनियरिंग की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा जेईई मेन्स में अखिल भारतीय स्तर पर 1886 व आईआईटी में प्रवेश के लिए आयोजित जेईई एडवांस्ड में 2962वीं रैंक प्राप्त की है। 12वीं की परीक्षा भी इसी वर्ष दी और 94.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। विदुषी की प्रतिभा को देखते हुए एलन कॅरियर इंस्टीट्युट ने निःशुल्क कोचिंग दी। विदुषी ने साइंस मैथ्स के साथ बॉयलोजी एडिश्नल ली। अब एम्स से एमबीबीएस की पढ़ाई करने जा रही है। पिता डॉ.विपिन कुमार वार्ष्णेय व मां डॉ.पूर्णिमा अग्रवाल दोनों पेशे से चिकित्सक हैं। बड़ी बहन विशाखा भी एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं।


नहीं मिला दादी-नानी का प्यार
घर में दूसरी बेटी के तौर पर जन्म के कारण विदुषी को दादी और नानी का प्यार नहीं मिला। उनकी सोच थी कि बेटा ही परिवार का नाम रोशन कर सकता है। दादी का निधन हो चुका है और करीब 10 सालों से नानी को देखा तक नहीं। मां डॉ. पूर्णिमा अग्रवाल ने अपनी दोनों बेटियों को एक्सपोजर देने का मन बनाया। वे खुद 1992 में एम्स पीजी एंट्रेंस में ऑल इंडिया फ़र्स्ट रैंक होल्डर थीं।


बेटियां बोझ नहीं होती, विदुषी ने दिलाई कार
मां पूर्णिमा अग्रवाल ने बताया कि लोग बेटियों को बोझ समझते हैं। पहले उन्हें बढ़ा करो फिर पढ़ा-लिखाकर शादी करो। हमेशा उस पर किसी न किसी रुप में माता-पिता को पैसा खर्च ही करना पड़ेगा जबकि ऐसा नहीं है। विदुषी पढाई में शुरू से ही होशियार थी। कभी कोचिंग से तो कभी स्कूल से स्कॉलरशिप मिलती रही है। इन स्कॉलरशिप के पैसों विदुषी ने मुझे कार खरीदकर उपहार में दी है। सबसे बड़ा तोहफा तो उसने तीनों परीक्षाओं में शानदार रैंक प्राप्त कर दिया है।


ओलम्पियाड में 55 मेडल जीते
विदुषी विभिन्न ओलम्पियाड में अब तक 55 मेडल जीत चुकी है। दक्षिण कोरिया में आयोजित आईजेएसओ 2015 में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी है। फिर वियतनाम में आयोजित आईबीओ 2016 व युनाइटेड किंगडम में आयोजित आईबीओ 2017 में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इन तीनों ओलम्पियाड में सिल्वर मैडल जीते। इसके अलावा एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के टैलेंटेक्स में ऑल इंडिया प्रथम रैंक हासिल कर चुकी है।


एम्स दिल्ली जाएगी विदुषी
विदुषी ने बताया कि अब आगे जेईई एडवांस्ड मैंने एम्स को क्रेक करने की तैयारी के तौर पर दिया। क्योंकि दोनों का पेपर पैटर्न सेम लेवल का होता है। एम्स के लिए मैंने कॉन्सेप्ट क्लीयर किए। नीट में सीधे सवाल पूछे जाते हैं जबकि एम्स में एडवांस लेवल के सवाल पूछे जाते हैं। मां को न्यूरो प्रॉब्लम के कारण आंखों और घुटनों में दिक्कत आई। बैड रेस्ट बता दिया। इसके बावजूद मां ने मुझे मोटिवेट किया, मेरी पढ़ाई को लेकर लगातार जागरूक रहती थीं। खुद उन्होने मुझे मोटिवेट किया और मैं पढ़ाई पर फोकस कर पाई। अब मैं एम्स दिल्ली में एमबीबीएस के लिए एडमिशन लेकर डॉक्टर बनना चाहती हूं, क्योंकि इस क्षेत्र में हमारे देश में बहुत जरूरत है। अच्छे इलाज की आज भी पूरे देश में जरूरत है।


गौरव है बेटियां
बेटियां हमारा गौरव हैं, इस तरह के उदाहरण सिद्ध करते हैं कि बेटियां किसी से पीछे नहीं हैं और हर क्षेत्र में कामयाबी हासिल कर रही हैं। इन बेटियों को आगे लाने के लिए एलन हर संभव मदद कर रहा है। - नवीन माहेश्वरी, निदेशक, एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट



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