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मोदी सरकार का कड़वा सच: कर्नाटक चुनाव के दौरान पेट्रोल—डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाने की आड़ में सरकारी वसूली

जयपुर। देश की सार्वजनिक पेट्रोलियम कंपनियां अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड की बढ़ती कीमतों की आड़ में लोगों से वसूली करने में लगी है। कर्नाटक चुनाव के दौरान अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने के बावजूद पेट्रोल—डीजल के भाव नहीं बढ़ाने का हवाला देकर अब लोगों को लूटा जा रहा है। जबकि हकीकत कुछ और ही है।
पेट्रोलियम कंपनियों ने कर्नाटक चुनाव से पहले 24 अप्रैल 2018 को पेट्रोल—डीजल की कीमतें बढ़ाना बंद किया था। उस समय भारत में कच्चे तेल के भाव 4,565 रूपए प्रति बैरल थे। 24 अप्रैल को पेट्रोल 77 रूपए 32 पैसे प्रति लीटर और डीजल 70 रूपए 25 पैसे प्रति लीटर थे। कर्नाटक चुनाव के बाद 14 मई से भाव बढ़ना शुरू हुए थे उस वक्त भारत में कच्चा तेल 4,793 रूपए प्रति बैरल था। यानी 24 अप्रैल से 14 मई तक कच्चे तेल के भाव में प्रति बैरल 228 रूपए की बढ़ोतरी हुई। इसका हवाला देकर तेल कपंनियों ने 14 मई से 30 मई तक पेट्रोल 3.89 रूपए और डीजल 3.53 रूपए प्रति लीटर महंगा कर दिया। आज भारत में कच्चे तेल के भाव 4,517 रूपए प्रति बैरल है, पेट्रोल 81.07 रूपए और डीजल 73.68 रूपए प्रति लीटर। आज भारत में कच्चा तेल 24 अप्रैल के मुकाबले 48 रूपए प्रति बैरल सस्ता है। इसके बावजूद पेट्रोल 3.75 रूपए और डीजल 3.53 रूपए प्रति लीटर महंगा है।

बढ़ाए 26 पैसे रोजाना, घटाए सिर्फ 6 पैसे
आंकड़ों से स्पष्ट है कि कर्नाटक चुनाव के दौरान पेट्रोलियम कंपनियां और सरकार कच्चा तेल महंगा होने का हवाला देकर पेट्रोल—डीजल की कीमतें बढ़ा हैं। असल में आज कच्चा तेल पहले के मुकाबले सस्ता है, फिर भी आज पेट्रोल के भाव में 6 पैसे और डीजल में 5 पैसे की मामूली कटौती की है। जब 15 दिन तक कीमतें बढ़ाई थी, तब पेट्रोल प्रतिदिन 26 पैसे और डीजल साढ़े 23 पैसे की औसत से महंगा हुआ था।

सच बयां करते आंकड़े

कच्चा तेल भाव पेट्रोल डीजल
24 अप्रैल 4,565 77.32 70.25
14 मई 4,793 77.51 70.48
31 मई 4,614 81.21 73.73
1 जून 4,517 81.07 73.68
(कच्चे तेल के भाव प्रति बैरल, पेट्रोल—डीजल प्रति लीटर)



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