सिण्डोली (कुण्डल). ग्राम पंचायत सिण्डोली के लक्ष्मीनारायणजी मन्दिर पर श्री श्याम रंगीला मित्र मण्डल और ग्रामीणों के संयुक्त तत्वावधान में राधा-कृष्ण की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा और श्रीमद् भागवत कथा समारोह में रविवार को कृष्ण-सुदामा मिलन के प्रसंग पर पाण्डाल में मौजूद श्रद्धालओं की आंखों से आंसूओं की धारा फूट पड़ी।
कथावाचक मुरारी लाल द्वारापुरा ने कहा कि कलियुग में कृष्ण-सुदामा की मित्रता मानव जाति के लिए एक अनूठा उदाहरण है। प्राण-प्रतिष्ठा से पूर्व रविवार देर शाम को गांव के मुख्य मार्गों में होकर भगवान कृष्ण की बारात निकाली गई। बारात में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु डीजे की धुन पर अबीर-गुलाल उड़ाते हुए नृत्य करते हुए और पटाखे चला कर खुशी जाहिर करते हुए चल रहे थे। मन्दिर से छह वर्ष पूर्व राधा-कृष्ण की मूर्तियां चोरी हो गई थी। सोमवार को 12 बजे मन्त्रोच्चार के साथ प्राण-प्रतिष्ठा होगी।
सिण्डोली सरपंच भौंरीलाल मीना ने बताया कि नगर भ्रमण यात्रा और प्राण प्रतिष्ठा समारोह में त्रिवेणी धाम के संत श्रीनारायणदास, जयपुर के संत गोपालदास, श्रीजी मन्दिर बैनाड़ा के संत रामदयालदास, आमोल संत घनश्यामदास, राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीना, श्रम एवं नियोजन मंत्री जसवंतसिंह यादव, राज्य महिला आयोग मंत्री सुमन शर्मा, युवा एवं खेल बोर्ड राज्य मंत्री भूपेन्द्र कुमार सैनी, विधायक शंकर लाल शर्मा, बांदीकुई विधायक अल्का सिंह गुर्जर, सिकराय विधायक गीता वर्मा सहित प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे।
सत्संग आयोजित
दौसा . बलराम सत्संग मण्डल एवं बाला हनुमान सेवा समिति की ओर से सुखदेश्वर महादेव सुभाष कॉलोनी में सत्संग आयोजित हुआ। संत घनश्यामदास ने कहा कि धर्म की जड़ सदा हरी रहती है। मण्डल अध्यक्ष मुरलीधर नाटाणी, द्वारका महेश् वरा, रामबाबू नाटाणी, धनश्याम रावत, बृजराज शर्मा, जगदीश आलूदा आदि थे।
रलावता (बडिय़ाल कलां) . ग्राम नीचला रलावता के बालाजी मन्दिर में कमल दास के सानिध्य में चल रहे गौरक्षार्थ एवं जन कल्याणार्थ नव कुण्डात्मक श्रीराम महायज्ञ एवं श्रीराम कथा का समापन रविवार को पूर्णाहुति एवं भण्डारे के साथ हुआ।
श्रद्धालुओं ने पंगत लगाकर प्रसादी ग्रहण की। कथा के समापन पर सुबह से ही रलावता सहित आसपास के श्रद्धालुओं का मंदिर में पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने परिक्रमा लगाकर खुशहाली की कामना की। यज्ञाचार्य पं.नरेन्द्र कुमार वशिष्ठ ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दिलवाई। भजनों पर श्रद्धालु भाव विभोर होकर नाचे। जयघोषों से समूचा वातावरण भक्तिमय हो गया।





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