Breaking News
recent

सत्रांक में शिक्षकों की मेहर, फिर भी बोर्ड परीक्षा में फेल

स्कूलों की ओर से योग्यता से अधिक भेजे गए सत्रांक सत्रांक की तुलना में प्राप्तांक बहुत कम

 

........................................
केस एक : रोल नम्बर 2420606

इस विद्यार्थी के अंग्रेजी में प्राप्तांक 9, सोशल साइंस में 17 व गणित में 9 अंक आए। जबकि स्कूल की तरफ से सत्रांक भेजे गए क्रमश: 19, 18 व 19। इसके बावजूद यह विद्यार्थी प्राप्तांक व सत्रांक का योग करने पर फेल हो गया।
केस दो : रोल नम्बर 2420380

इस विद्यार्थी के सोशल साइंस में प्राप्तांक 3, गणित में 7, विज्ञान में 11 व अंग्रेजी में 16। जबकि स्कूल की तरफ से सत्रांक भेजे गए क्रमश: 20, 20, 19 व 19। परिणाम दोनों अंकों को जोडऩे पर भी 33 अंक नहीं बने।
केस तीन : रोल नम्बर 2420441

इस विद्यार्थी ने लिखित बोर्ड परीक्षा में अंग्रेजी विषय में 10, विज्ञान में 9, सोशल साइंस में 9 तथा गणित में 7 अंक प्राप्त किए है। जबकि स्कूल से इन सभी विषयों में 20 में से 20 सत्रांक ही भेजे गए।
केस चार : रोल नम्बर 2420551

इस विद्यार्थी ने अंग्रेजी विषय में 5, साइंस में 9, गणित में 13 व हिन्दी में 8 अंक प्राप्त किए है। जबकि अध्यापकों ने मेहरबानी कर क्रमश: 18, 17, 19 व 18 अंक सत्रांक के रूप में बोर्ड को भिजवाए थे।
.......................................................

पाली. ये चार उदाहरण है उन ‘होनहार’ विद्यार्थियों के जिन्होंने पूरे शिक्षा सत्र में तीन टेस्ट, अद्र्धवार्षिक परीक्षा और अनुशासन-उपस्थिति इत्यादि गतिविधियों में श्रेष्ठता सिद्ध की, लेकिन वार्षिक परीक्षा में उनकी योग्यता धरी रह गई और वे फेल हो गए।

दरअसल, स्कूल में श्रेष्ठता सिद्ध करने वाले विद्यार्थियों की सच्चाई ठीक उलट है। निजी व सरकारी सभी स्कूल अपना परिणाम सुधारने के लिए आंखें बंद कर बच्चों को सत्रांक दे रहे हैं। अधिकांश स्कूल के अध्यापकों ने अपने विषय में विद्यार्थियों को 15 या उससे अधिक अंक दिए है, लेकिन जब परिणाम आया तो पता लगा कि विद्यार्थी शेष बचे 80 अंक में से 10 अंक भी प्राप्त नहीं कर सकता है। इसके पीछे अध्यापकों का तर्क है कि सत्रांक चार परीक्षाओं को मिलाकर दिए जाते हैं। इससे विद्यार्थी बेहतर अंक प्राप्त कर लेता है।

इस तरह देते है अंक
सत्रांक के अंक देने के लिए तीन परखों और अद्र्धवार्षिक परीक्षा के अंक शामिल किए जाते हैं। इसके अलावा इसमें प्रोजेक्ट वर्क के 5 अंक, 3 अंक उपस्थिति के और 2 अंक अनुशासन के भी होते है। ऐसे में अध्यापक 10 अंक तो बिना किसी परीक्षा के ही दे देता है।

परिणाम सुधारने का प्रयास
सत्रांक को वास्तव में अध्यापकों ने स्कूल व अपने विषय का परिणाम सुधारने का माध्यम बना रखा है। इसका कारण है कि कम परिणाम देने पर अध्यापकों को नोटिस दिया जाता है। स्कूल की भी सूची तैयार की जाती है। इससे बचने के लिए संस्था प्रधान व अध्यापक सत्रांक में पूरे के पूरे अंक देते हैं।

15 हजार विद्यार्थी पास
जिले में इस वर्ष दसवीं कक्षा में 26 हजार 508 विद्यार्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 6641 प्रथम श्रेणी से, 5066 द्वितीय श्रेणी से और 3695 तृतीय श्रेणी से उत्तीर्ण हुए थे। इस तरह जिले में 15 हजार 402 विद्यार्थी पास हुए। इसके अलावा अधिकांश विद्यार्थी फेल हुए। जिनके सत्रांक 15 या उससे अधिक है।

वास्तविक अंक देने चाहिए
परीक्षा में सत्रांक वास्तविक ही देने चाहिए। इसमें बच्चे के शैक्षणिक स्तर और योग्यता का ख्याल रखा जाना चाहिए। वैसे कई बार बोर्ड की तरफ से भी शैक्षणिक स्तर की जांच करवाई जाती है।

पन्नालाल अहीर, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक, पाली

 



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.