अजमेर
प्रदेश में जिले के सरकारी कॉलेजों के हाल खराब हैं। पिछले सत्र से कहीं उपाचार्य तो कहीं सह आचार्य कॉलेज संभाल रहे हैं। कई कॉलेज मे स्थाई प्राचार्य-उपाचार्य नहीं है। जुलाई-अगस्त में कई कॉलेज में सेवानिवृत्तियों के बाद स्थिति ज्यादा खराब हो सकती है।
उच्च शिक्षा विभाग के अधीन राज्य में 230 सरकारी कॉलेज हैं। इनमें से 50 प्रतिशत से ज्यादा कॉलेज में स्थाई प्राचार्य या उपाचार्य पद खाली हैं। कई कॉलेज को पिछले एक साल अथवा सात-आठ महीनों से सह आचार्य या उपाचार्य चला रहे हैं। इसके अलावा लम्बे अर्से से वरिष्ठ व्याख्याताओं की डीपीसी भी नहीं हुई है। डीपीसी होने पर रीडर्स उपाचार्य पद पर पदोन्नत होंगे। जबकि उपाचार्यों को स्नातक और स्नातकोत्तर कॉलेज में प्राचार्य पद पर पदोन्नति मिलेंगी।
जीसीए भी जुलाई-अगस्त में खाली
संभाग और राज्य का सबसे पुराने सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय के हाल भी खराब हैं। यहां उपाचार्यों के दो पद करीब सात महीने से रिक्त हैं। प्राचार्य डॉ. एस. के. देव जुलाई और एकमात्र उपाचार्य डॉ. पी. सी. सेठी इनके बाद सेवनिवृत्त होंगे। इनके बाद कॉलेज कौन संभालेगा फिलहाल तय नहीं है।
राज्य में भी हाल खराब
सरकारी कॉलेज के स्तर पर प्रदेश में भी हाल खराब हैं। प्रदेश के 50 फीसदी कॉलेज में स्थाई प्राचार्य और उपाचार्य नहीं हैं। केवल रीडर या सीनियर टीचर इनकी कमान संभाले हुए है। पिछले पांच साल में नए खुले कॉलेज के हाल सर्वाधिक खराब हैं। इन कॉलेज की ना तो कहीं बिल्डिंग बनी है, ना यहां पर्याप्त स्टाफ है। सरकार ने वाह-वाही के लिए कॉलेज तो खोल दिए पर इनकी सार-संभाल करने वाला कोई नहीं है। कई कॉलेज या तो सरकारी स्कूल, अटल सेवा केंद्र, तहसील कार्यालय, सर्व शिक्षा अभियान के दफ्तर या किराए के भवनों में संचालित हैं। इन कॉलेज की अब तक कोई पहचान नहीं बनपाई है।
अजमेर जिले के हाल....
एस. डी. कॉलेज ब्यावर-आर. सी. लोढ़ा (कार्यवाहक)
राजकीय गोविंद सिंह गुर्जर कॉलेज नसीराबाद-आर. के. जैन (उपाचार्य)
राजकीय कन्या महाविद्यालय अजमेर-चेतन प्रकाश (उपाचार्य)राजकीय महाविद्यालय केकड़ी-पद रिक्त
सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय-दो उपाचार्यों के पद रिक्त
राजकीय महाविद्यालय मसूदा-(नया कॉलेज)
राजकीय महाविद्यालय अरांई-(नया कॉलेज)





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