बाड़मेर. राज्य सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में 2 जुलाई से शुरू की जाने वाली अन्नपूर्णा दूध योजना कुक-कम हेल्पर के गले में नई घंटी हो गई है। अल्प मानदेय में स्कूलों में पोषाहार पकाने वाली महिला कार्मिकों को अब दूध भी गर्म करना पड़ेगा। राज्य में करीब 1 लाख 29 हजार कुक-कम हेल्पर हैं।
स्कूलों में पोषाहार बनाने वाली कुक-कम हेल्पर को प्रतिमाह 1200 रुपए मासिक मानदेय मिलता है। जिसमें स्कूल में पढऩे वाले विद्यार्थियों के लिए सप्ताह में तय मीनू के अनुसार खाना तैयार करना है। अब 2 जुलाई से खाने के साथ बच्चों के लिए दूध भी गर्म करना पड़ेगा।
जल्दी आना होगा स्कूल
प्रार्थना के तुरंत बाद स्कूलों में बच्चों को दूध का वितरण करना है। ऐसे में दूध गर्म करने के लिए कुक-कम हेल्पर को सुबह जल्दी स्कूल पहुंचाना होगा। जबकि पोषाहार दोपहर में दिया जाता है, इसलिए सुबह जल्दी आने की जरूरत नहीं थी। लेकिन अब नई व्यवस्था में स्कूल समय से एक-डेढ़ घंटे पूर्व स्कूल पहुंचना होगा।
दूरस्थ इलाकों में अधिक परेशानी
जिले की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए कई कुक-कम हेल्पर दो से तीन किलोमीटर दूर जाकर स्कूलों में पोषाहर बनाती हैं। दूरस्थ इलाकों में जाने वाली महिला कार्मिकों के परेशानी बढ़ जाएगी।
अधिकारों का हनन
सरकार अल्प मानदेय में काम करने वाली कुक-कम हेल्पर के मानव अधिकारों का हनन कर रही है। सरकार समान काम के लिए समान वेतन दे इसके लिए सरकार से मांग की जाएगी।
लक्ष्मण वडेरा, प्रदेशाध्यक्ष, कुक-कम हेल्पर संघर्ष समिति
मानदेय में वृद्धि की जाए
सरकार हेल्पर को न्यूनतम मानदेय 5000 रुपए दे जिससे परिवार का गुजारा हो सके। संघ राज्य सरकार से इसके लिए मांग करेगा।- शेरसिंह भुरटिया, प्रदेश महामंत्री राजस्थान प्राथमिक माध्यमिक शिक्षक संघ
हक मिलना चाहिए
संघ के पदाधिकारियों ने हेल्पर के मानदेय वृद्धि के लिए जयपुर में कार्मिकों की प्रदेश स्तरीय बैठक में मांग की थी। सरकार हेल्पर को उनका हक तो दे।- छगनसिंह लुणू, जिलाध्यक्ष राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम





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