भुवनेश पंड्या/उदयपुर . खान विभाग की अनदेखी के चलते खान मालिक सुरक्षा नियमों को धत्ता बता रहे हैं। कुछ महत्वपूर्ण नियम खानों में ही दफन होकर रह गए हैं। कुछ अधिकारी भी मानते हैं कि प्रदेश की खानों में सुरक्षा नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ती हैं और वे देखकर भी कुछ कर नहीं पाते।
प्रदेश में कुल 15241 खानें और 17899 क्वारी लाइसेंस है। इनमें से 9167 व 17631 क्वारी लाइसेंसधारी सुरक्षा नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। राजस्थान माइनर मिनरल कांसेशन रूल्स 2017 के अनुरूप हर खान पर माइनिंग इंजीनियर लगाना अनिवार्य है। साथ ही हर खान पर सीढ़ीनुमा खनन होना चाहिए ताकि सुरक्षा बनी रहे। ऐसे ही कई नियम हैं, जिनकी पालना जरूरी है। दूसरी ओर, कई खान मालिकों का मानना है कि जमीनी स्तर पर इन नियमों का पालन संभव नहीं है। उनके अनुसार अव्वल तो इंजीनियर ही मिलते नहीं है या वे इतना पैसा मांगते हैं कि उन्हें नौकरी पर रखना संभव नहीं होता। खनन पट्टा खनन अनुज्ञप्ति आवंटित करने से पहले इन नियमों की पालना अपेक्षित नहीं होती है। पट्टा प्रभाव में आने के बाद इन योग्यताधारी व्यक्ति की नियुक्ति जरूरी है।
ये नियम होते हैं लागू
कार्यशील खानों में खान अधिनियम 1952 की धारा 17, धात्विक खान विनियमन 1961 के विनियम 34(1) और राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत नियम 2017 के नियम 30 के प्रावधान लागू होते हैं।
ये हैं संभाग के हाल
जिला...खनन पट्टे... नियमों की पालना नहीं
उदयपुर ? 702... 305
राजसमन्द 2080...1021
बांसवाड़ा 121... 69
डूंगरपुर 153...56
चित्तौडगढ़़ 162...120
प्रतापगढ़ 103...56
अधिक खनन पट्टों वाले जिलों के हाल
प्रदेश में राजसमन्द में ऐसे सर्वाधिक मामलों के बाद भीलवाड़ा में 1197 में से 29, अजमेर में 1078 में से 938, नागौर में 982 में से 797, जयपुर में 1155 में से 713, सीकर में 631 में से 494, जोधपुर में 549 में से 511, जालौर में 595 में से 570, जैसलमेर में 596 में से 591 और बूंदी में 867 में से 507 खदानों के संचालक नियमों की पालना नहीं करते।
प्रयास जारी है
हम प्रयास करते हैं कि नियमों के अनुसार ही खान संचालक खानों का संचालन करें। जो नियमों का पालन नहीं करते हैं, उन्हें भी नियमों से चलने के निर्देश दे रहे हैं।
डीएस मारू, निदेशक, खान एवं भू विज्ञान निदेशालय उदयपुर





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