श्रीगंगानगर/श्रीकरणपुर. गांव बंद आंदोलन के चलते फल, सब्जी व दूध की आपूर्ति नहीं होने से जहां आमजन को परेशानी हो रही है वहीं, चाय बेचने वाले दुकानदारों और दोधियों का तो धंधा ही चौपट हो गया है। आमजन पेट भरने के लिए दूध, फल व सब्जी किसी तरह पूर्ति कर रहा है लेकिन दोधियों व चाय बेचने वाले दुकानदारों की दशा लगातार बिगडती जा रही है। दूध की कमी से संकट नई धानमंडी में पदमपुर मार्ग से प्रवेश करते ही एक पेड़ की छांव में चाय का काम करने वाले हजारीलाल धानका ने बताया कि दूध की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने से उसकी आजीविका का साधन ही खत्म हो गया है। उसने बताया कि प्रतिदिन काम करके होने वाली आमदनी से ही वह घर चलाता है। लेकिन कामधंधा नहीं होने से भूखे मरने की नौबत आ गई है। उसने बताया कि दिन में अमूमन 20 लीटर दूध की लागत थी। लेकिन अब दो लीटर दूध की व्यवस्था होने से काम धंधा बंद होने की कगार पर है। उसने कहा कि दूध नहीं मेरे बच्चों के मुंह का निवाला छीन लिया है। इसके अलावा अस्पताल के सामने चाय बेचने वाले जेठा राम ने भी ऐसी ही परेशानी बताई।
दूधिए भी परेशान
उधर, किसान आंदोलन से अधिकांश दूधिए नाखुश हैं। दूध विक्रेता यूनियन के अध्यक्ष बनवारीलाल मोंगा ने बताया कि एक दो दिन के आंदोलन के लिए उनकी यूनियन ने हमेशा समर्थन दिया, लेकिन दस दिन के आंदोलन से उनका धंधा चौपट होने की आशंका है। मोंगा ने कहा कि प्रशासन व सरकार की नाकामी के चलते ही ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। आंदोलन का फायदा उठाकर किसान कस्बे से बाहर नाकों पर महंगी दरों पर दूध बेच रहे हैं। सरकार पर इसका असर हो ना हो लेकिन यह आमजन के लिए बेहद परेशानी भरा है।
आमजन करे सहयोग
गंगानगर किसान समिति के जिला पदाधिकारी चमकौरसिंह बराड़ ने स्वीकार किया कि गांव बंद आंदोलन से कुछ लोगों को परेशानी जरूर हुई है। लेकिन किसी का कामधंधा बिगाडऩा उनका मकसद नहीं है। बराड़ ने कहा कि 50 साल से किसानों का शोषण हो रहा है। उत्पादन की लागत का डेढ़ गुणा भाव की मांग को लेकर ही किसान आंदोलन पर हैं। आमजन को आंदोलन में सहयोग करना चाहिए।





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