चित्तौडग़ढ़. ग्रीष्मावकाश में इन दिनों विश्व विरासत में शामिल शौर्य भूमि चित्तौड़ दुर्ग पर घूमने आने वाले पर्यटक बढ़ गए है। प्रचण्ड गर्मी में शीतल जल का पर्याप्त प्रबन्ध नहीं होने से पर्यटकों को परेशानी हो रही है। दुर्ग में कुछ स्थानों पर लगे वाटर कूलर में से भी कुछ खराब पड़े हुए है तो कुुछ में शीतल जल ही नहीं आ रहा है।
गर्मी के मौसम में सुबह ८ बजे से ही दुर्ग पर घूमने के लिए पर्यटकों का पहुंचना शुरू हो जाता है। कई पर्यटक पिकनिक के मूड में आने से दोपहर में भोजन भी दुर्ग पर ही करते है। ऐसे में शीतल जल उपलब्ध नहीं होने से परेशान हो जाते है। दुर्ग पर पुरातत्व सर्वेेक्षण विभाग की ओर से पद्मनी महल, विजय स्तम्भ परिसर एवं कुंभा महल परिसर में वाटर कूलर लगे हुए है। इनमें से कुंभा महल में लगा वाटर कूलर पिछले कुछ समय से खराब बताया गया है। यहां दिनभर पर्यटकों की आवक रहने के साथ शाम को लाईट एण्ड साउण्ड के समय भी बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक आते है। कालिका माता मंदिर परिसर एवं सातबीस देवरी जैन मंदिर परिसर में मंदिर प्रबंधन की तरफ से शीतल जल का इन्तजााम है। विशाल क्षेत्र में फैले दुर्ग परिसर में बड़े हिस्से में प्रचण्ड गर्मी में पेयजल उपलब्धता का कोई इंतजाम नहीं है। पर्यटक यदि सूरजपोल, कीर्तिस्तम्भ, भीमलत, चतरंग मोरी जैसे स्थानों की तरफ घूमने निकल जाता है वहां प्यास बुझाने के लिए कोई स्रोत नहीं होता है। ऐसे में सूखे हलक तर करने के लिए परेशाना होना पड़ता है।
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पानी की बोतले खरीदने को मजबूर
दुर्ग पर शीतल पेयजल उपलब्धता के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से पर्यटक महंगे दामों पर शीतल जल की बोतले खरीदने को मजबूर है। दुर्ग पर कई जगह अंकित दाम से भी अधिक कीमत पर एक-दो लीटर पानी की बोतले बेची जा रही है। तेज गर्मी के चलते प्लास्टिक की इन बोतलों में भरा पानी भी खरीदने के कुछ देर में गरम हो जाता है। ऐसे में इनका उपयोग भी पर्यटक अधिक समय नहीं कर पाते है और जरूरत होने पर फिर से पानी की बोतल खरीदनी पड़ती है।





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