झुंझुनूं.
अंचल के अधिकांश जीएसएस अब निजी हाथों में चले गए हैं। अजमेर डिस्कॉम की ओर से अंचल में संचालित जीएसएस को बेहतर तरीके से नहीं संभाल पाने के चलते इन 134 जीएसएस को निजी हाथों में सौंप दिया गया है। निगम का दावा हैकि निजी हाथों में चले जाने से इन जीएसएस का संचालन बेहतर कार्यकुशलता के साथ होगा। अकेले झुंझुनूं जिले में कुल 185 जीएसएस हैं जिनमें 134 का निजीकरण कर इसका जिम्मा हिसार की डिंग मैन पॉवर एंड सिक्योरिटी सर्विस को सौंप दिया है। निगम ने महज 51 जीएसएस अपने अधीन रखें हैं। लेकिन गौर फरमाने वाली बात यह हैकि अब तक जीतने भी जीएसएस का निजीकरण किया गया है। वहां के हालात बहुत खराब हैं। चौबिसों घंटे एक ही कर्मचारी को डयूटी पर रखा जाता है और संसाधन नाममात्र के दिए जा रहे हैं। बिजली सप्लाई भी सही तरीके से नहीं हो पा रही हैं।
एफटीआर भी ठेके पर
जीएसएस के बाद हॉल में अजमेर डिस्कॉम की ओर से फॉल्ट रिमूवल टीम का काम निजी हाथों में सौंप दिया है। इसमें झुंझुनूं के अलावा नवलगढ़, खेतडी, चिड़ावा व पिलानी शामिल हैं।
अब उठे विरोध के स्वर
जीएएस को निजी हाथों में सौंपने को लेकर जिले में कई जगहों पर किसानों की ओर से विरोध प्रदर्शन भी किया जा चुका है। विरोध करने वाले किसानों का आरोप है कि जीएसएस को ठेकों पर सौंपने के बाद व्यवस्थाएं लडखड़़ा गई हैं। इसके अलावा नियमित कर्मचारी भी इसका विरोध कर रहे हैं।
निजीकरण पर एसई दे गए गोलमाल जवाब...
जीएसएस को निजी हाथों में सौंपने और किसानों-कर्मचारियों के विरोध के बारे में जब निगम के एसई एसएन चावला ने कहा कि किसी भी चीज के फायदे का पहले पता नहीं चल पाता है। व्यवस्था से सुविधाओं का विस्तार होने से उपभोक्ताओं की समस्या का त्वरित हल होने से फायदा होगा।
कर्मचारियों के खिलाफ साजिश....
अजमेर विद्युत वितरण श्रमिक संघ के महामंत्री नरेंद्रसिंह राठौड़ ने कहा कि निजीकरण करना कर्मचारियों के खिलाफ साजिश है। निजीकरण से किसी भी वर्ग को फायदा नहीं होगा। इसके खिलाफ 21 जून को एकजुट होकर आंदोलन की रूपरेखा बनाई जाएगी।





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