बांदीकुई.
सरकार की ओर से पानी की समस्या के स्थाई समाधान के लिए स्वीकृत कराए गए नलकूपों के निर्माण पर संकट के बादल मंडराते दिखाई दे रहे हैं। क्योंकि नलकूप निर्माण के लिए बाणगंगा नदी पहुंची मशीन को ग्रामीणों ने विरोध कर दो बार बैरंट लौटा दिया है। हालांकि इस मामले में प्रशासन हाथ पर हाथ रखे बैठा हुआ है। ऐसे में अब शहर के लोगों की पानी की समस्या के समाधान की आस भी टूटती दिखाई दे रही है। वहीं आने वाले दिनों में लोगों के लिए पानी की समस्या कोढ़ में खाज बन सकती है। क्योंकि इन दिनों ही लोगों को 10 दिन के अंतराल में पानी मिल रहा है, जो भी मात्र आधा घण्टे।
सूत्रों के मुताबिक जलदाय विभाग की ओर से हाल ही में आठ-आठ इंच के 10 नलकूप स्वीकृत कराए गए थे। इसके लिए भूजल वैज्ञानिकों ने सर्वे में बाणगंगा नदी में पानी होना बताया, तो जलदाय विभाग की ओर से टेण्डर करके गत 15 जून को एक प्रोजेक्ट कंपनी को बाणगंगा में नलकूप निर्माण करने के कार्य आदेश जारी कर तीन माह में कार्य पूरा किए जाने के निर्देश दिए।
अधीक्षण अभियंता रामनिवास मीणा, अधिशासी अभियंता ओपी शर्मा एवं सहायक अभियंता राजेश शर्मा ने मौके पर जाकर नलकूप निर्माण के लिए जगह भी चिह्नित कर ली। पिछले दिनों बनवारीलाल व सुमेर मशीन लेकर बाणगंगा पहुंचे, तो कुछ ही देर में महिला एवं पुरुषों ने मौके पर पहुंचकर नलकूप निर्माण का विरोध करना शुरू कर दिया। ऐसे में बोरिंग मशीन को वापस लाना पड़ा।
जलदाय विभाग सहायक अभियंता ने उपखण्ड अधिकारी चिम्मनलाल को वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया, लेकिन प्रशासन की ओर से भी मामले में शिथिलता बरती जा रही है। यह मामला अब राज्य सरकार तक पहुंच गया है। बताया जा रहा है कि इन नलकूपों का निर्माण होने पर प्रतिदिन करीब 18 लाख लीटर पानी का उत्पादन हो सकता था । इससे शहर के लोगों को काफी हद तक राहत मिल सकती थी।
हालांकि अधीक्षण अभियंता दौसा रामनिवास मीणा ने अतिरिक्त मुख्य अभियंता जयपुर को पत्र लिख कर नलकूप निर्माण में आ रहे व्यवधान से अवगत करा दिया है। वहीं सहायक अभियंता को पुलिस को वस्तुस्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। सहायक अभियंता राजेश शर्मा का कहना है कि उन्होंने मामले से एसडीओ को अवगत करा दिया है। अधिशासी अभियंता ओपी शर्र्मा का कहना है कि उन्होंने जिला कलक्टर को भी मामले से अवगत करा दिया है। प्रशासन सहयोग करता है, तो नलकूपों का निर्माण करा दिया जाएगा।
इसलिए चुनी बाणगंगा
बसवा तहसील क्षेत्र से होकर बाणगंगा एवं सांवा नदी गुजरती है। सांवा नदी में भारी मात्रा में बजरी खनन होने से जल स्तर काफी नीचे चला गया। ऐसे में बोरिंग निर्माण के कुछ दिनों बाद ही पानी छोड़ जाती हैं, जो कि जलदाय विभागीय अधिकारियों के लिए परेशानी बना हुआ था। जबकि बाण गंगा नदी में खनन नहीं होने के कारण पानी की आवक है। ऐसे में भूजल वैज्ञानिकों ने बाणगंगा में ही नलकूप निर्माण कराए जाने की सलाह दी थी।





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