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पिछले साल की बारिश से इस गांव मे तबाही के बाद भी आज तक नही हुआ कोई समाधान, फिर मानसून सिर पर.....

पाली/गुन्दोज. निकटवर्ती ढोला गांव में पिछले साल बारिश से हुई तबाही से ग्रामीण अब भी सिहर रहे हैं। बारिश का मौसम सिर पर है और गांव के पानी की निकासी की उचित व्यवस्था अब तक नहीं होने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। सडक़ निर्माण कम्पनी और प्रशासन द्वारा अब तक कोई उचित कदम नहीं उठाया गया है।

गौरतलब है कि फोरलेन निर्माण के कारण पिछले साल ढोला गांव में बाढ़ के हालात बने थे। गांव की गलियों व मोहल्लों में कई फीट पानी भर गया था। इससे गांव में कई पालतू मवेशी काल का ग्रास बने थे और कई मकान ढह गए थे। कई कच्चे मकानों में दरारें आ गई थी। ग्रामीण पिछले एक साल से गांव के पानी की निकासी की व्यवस्था के लिए प्रशासन से गुहार लगाते रहे हैं लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे गांव वालों में इस बारिश के मौसम में भी हालात खराब होने का भय व्याप्त है।

यूं बिगड़े थे हालात

ग्रामीणों के अनुसार गांव से बारिश के पानी की निकासी के लिए तीन प्राकृतिक नाले सडक़ को पार करते थे। फोरलेन निर्माण के कारण नालों को बंद कर दिया गया। पिछले साल बारिश के दौरान गांव का पानी बाहर नहीं निकल पाया। इससे गांव में पानी भर गया और तबाही मची। गांव वालों ने कई दिन गांव के बाहर या खुले आसमान तले टेंट में बिताए।

कई जनप्रतिनिधि-अधिकारी आए, समाधान नहीं

गांव में तबाही के बाद में कई जनप्रतिनिधियों अधिकारियों ने मौका मुआयना किया। ग्रामीणों की समस्याओं को सुना और चले गए, लेकिन समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो पाया। ग्रामीणों अनुसार सडक़ निर्माण कम्पनी द्वारा तीन नालों के स्थान पर एक पाइप डाला गया है। इस पाइप से बारिश के पानी की निकासी के बजाय जंगल का पानी गांव में घुसने की और आशंका बन गई है।

मेरी भैंस मर गई थी

पिछले साल बाढ में मेरी भैंस मर गई थी। मेरा मकान भी गिर गया था। वह स्थिति याद करके आज भी मुझे नींद नहीं आती है। सरकारी सहायता के रूप में मात्र 3800 रुपए मिले।

मानाराम सीरवी, ग्रामीण

बाढ़ के समय लोगों के घर में रखा धान, गेहूं भी गया था। वह मंजर याद आता है तो आंखों में आंसू छलक जाते हैं। समस्या का समाधान होना चाहिए नहीं तो बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।

लालाराम सीरवी, उप सरपंच, ढोला

सरकार कहे कि हमारे पास सहायता नहीं है तो हम दूसरे गांव में जाकर बस जाएंगे। वापस हादसा तो देखना नहीं पड़े।

सीतादेवी देवासी, ग्रामीण

सरकार के पास सिर्फ आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं है। मैंने घर-घर जाकर स्थिति देखी थी। समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।

भूराराम सीरवी, सदस्य, राजस्थान कांग्रेस कमेटी



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