नरेगा संविदा कार्मिक जिला संघ के धरने पर असर
छोटीसादड़ी एक माह से भी अधिक समय से नरेगा संविदा कार्मिक संघ अपनी विविध मांगों को लेकर कलमबद्ध धरने पर बैठे है। जिसके चलते श्रमिकों के कार्य , भुगतान, आवास आदि प्रभावित हुए है।
जिले में बकाया 36 2.15 लाख का श्रमिक भुगतान गत माह से बकाया है। पूर्व में जो भुगतान हुआ है, वो श्रमिको के बैंक खाते में जमा नहीं होने से कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। मात्र ऑनलाइन खाना पूर्ति की जा रही हैं। मानव दिवस से स्पष्ट है कि श्रमिकों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। कार्य स्थल पर नियोजित श्रमिको का छाया, पानी, मेडिकल किट इत्यादि सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के मस्टररोल नरेगा योजना से जारी होने का प्रावधान है। हड़ताल के चलते आवास भी अधूरे पड़े हैं। किश्तों का भुगतान नहीं हो पा रहा है।
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क्या कहते है आंकड़े
श्रमिक नियोजन . 6 716 2
बकाया श्रमिक भुगतान . 36 2.12 लाख
सर्जित मानव दिवस . 6 .37 लाख मात्र माह मई 2018 तक
गत वर्ष सर्जित मानव दिवस . 17.53 लाख माह मई 2017
जिले नरेगा संविदा कार्मिक धरने पर . 104
जारी मस्टररोल . 34322
फीडिंग से शेष मस्टररोल . 18 071
यह है संविदा कार्मिको की प्रमुख मांग
सविंदा कार्मिको की मांग है कि कनिष्ठ लिपिक सीधी भर्ती 2013 एवं अधीनस्थ सेवा भर्ती 2013 संपूर्ण पदों पर पूर्ण की जाए। पंचायती राज मंत्रालयिक कर्मचारी संघ की मुख्य मांग केडर स्टेरेंथ रिव्यू, स्थानांतरण ग्रह जिले में, अनुकम्पा नियुक्ति में कनिष्ठ लिपिक भर्ती में टंकण परीक्षा के निजात की सहित अन्य मांगे है।
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कांठल में तैयार होंगे एलोवेरा-आंवला के उत्पाद
वन विभाग की ओर से की जा रही कवायद
वन उपज संग्रहण भंडारण एवं बिक्री केन्द्र बनाए
प्रतापगढ़ कांठल वासियों को अब इसी वर्षसे ऐलोवेरा और आंवला का ताजा और शुद्ध जूस मिल सकेगा। इसके लिए वन विभाग की ओर से प्रतापगढ़ समेत जिले में तीन स्थानों पर लघु वन उपज प्रसंस्करण केन्द्र की स्थापना की गई है। इन केन्द्रों पर मशीनें लगाने के बाद इसी वर्ष से उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। वन विभाग की ओर से भवन बना दिए गए है।इनमें मशीनें लगाई जानी है।इन भंडारण केन्द्रों में एलोवेरो व आंवला के जूस के साथ अन्य उत्पाद भी तैयार किए जाएंगे। वहीं हर्बल गुलाल भी तैयार की जाएगी।
कई स्वास्थ्य केन्द्रों पर नहीं हो रहा निस्तारण
50 हैक्टेयर में और लगाया एलोवेरा
वन मंडल में आंवला, पलाश के काफी पेड़ है। वहीं ऐलोवेरा के भी कई जगह प्लांटेशन लगा रखे है। ऐसे में यहां कच्चा माल भी काफी मिलता है।इसे देखते हुए विभाग की ओर से यहां प्रसंस्करण केन्द्र बनाए जा रहे है। रेंजर नरेन्द्र विश्नोई ने बताया कि बांसवाड़ा रोड स्थित करमदिया नर्सरी में केन्द्र का भवन बनाया गया है।इसके लिए 13 लाख 50 हजार रुपए लगाए गए है। यह कार्य मनोहरण वन सुरक्षा समिति के माध्यम से कराया गया है।वहीं एलोवेरा के लिए 50 हैक्टेयर में प्लांटेशन भी लगाया गया है।
तीन स्थानों पर बनाए गए केन्द्र
वन विभाग की ओर से जिले में इस वर्ष तीन स्थानों पर लघु वन उपज संग्रहण केन्द्र बनाए गए है।जिसमें प्रतापगढ़ के करमलिया नर्सरी, धरियावद और पीपलखूंट में केन्द्र बनाए गए है।जबकि बांसी में पांच वर्षसे प्रसंस्करण केन्द्र चल रहा है। जिसमें एलोवेरो, आंवला का जूस तैयार किया जा रहा है।इसके साथ ही हर्बल गुलाल भी तैयार की जा रही है।
वन सुरक्षा समितियों को मिलेगा रोजगार
विभाग की ओर से बनाएग लघु वन उपज संग्रहण केन्द्र में विभिन्न उत्पाद तैयार किए जाएंगे। यह उत्पाद स्थानीय वन सुरक्षा समितियों के माध्यम से ही तैयार होंगे।इसके बाद विपणन भी कराएंगे।जिससे समितियों के लोगों को रोजगार मिल सकेगा।
शुद्ध उत्पाद बनाएंगे
प्रतापगढ़ के जंगल में कई औषधीय पादप पाए जाते है।जिसमें आंवला और एलोवेरा भी काफी मात्रा में है। इसे देखते हुए बांसी में लघु वन उपज प्रसंस्करण केन्द्र पर उत्पाद तैयार किए गए थे।इसके अच्छे परिणाम को देखते जिले में धरियावद, प्रतापगढ़ और पीपलखूंट में भी लघु वन उपज संग्रहण केन्द्र बनाए गए है।इनमें हम शुद्ध उत्पाद बनाएंगे।
अमरसिंह गोठवाल
उपवन संरक्षक, प्रतापगढ़





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