जवाई के पानी पर नेता कर रहे राजनीति, अब जालोर न्यायालय में लड़ेगा लड़ाई
जालोर. जवाई बांध के पानी पर पाली जिले के अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों द्वारा जालोर के हक को दरकिनार करते हुए लगातार लिए जा रहे निर्णयों के विरोध में मंगलवार को पेंशनर भवन में प्रबुद्धजनों की बैठक का आयोजन किया गया। जवाई बांध पर हक निर्धारण को लेकर पत्रिका की इस मुहिम में सहभागिता निभाते हुए प्रबुद्धजनों ने जवाई बांध जल एवं जालोर बांध निर्माण से हुई क्षति को परिलक्षित कर जालोर का हक निर्धारण तथा सिंचाई एवं कृत्रिम बाढ़ को रोकने के लिए प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए बैठक में चर्चा की। साथ ही सभी ने एक स्वर में कहा कि इन हालातों से जालोर जिले को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है और लगातार लिए जा रहे अदूरर्शी निर्णयों से भविष्य में और अधिक नुकसान की संभावना बन रही है।ऐसे में अब जरुरी हो गया है कि जवाई बांध के पानी पर जालोर की जनता का हक निर्धारण हो और इसके लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाए। सेवानिवृत्त कोषाधिकारी ईश्वरलाल शर्मा ने कहा कि बांध निर्माण के बाद 1973 में जालोर ने जवाई बांध के जरिए मानव निर्मित बाढ़ को झेला। बांध के निर्माण के बाद जवाई नदी में पानी का बहाव कम होने से बांध निर्माण से लेकर अब तक 122 गांवों को पानी नहीं मिलने से क्षति हुई। उन्होंने कहा कि पाली जिले ने इस बांध पर एकाधिकार मान लिया है और इन हालातों के लिए राजनीतिक कमजोरी भी जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि बांध से 45 फीट के बाद ही नहीं, बल्कि 45 फीट तक के पानी में भी जालोर का हक निर्धारित हो। इस मामले में अधिवक्ता मधुसूदन व्यास ने कहा कि जवाई तीन जिलों से जुड़ा मामला है, इस पर आपसी सहमति से निर्णय लिया जा सकता था, लेकिन अब ये हालात नजर नहीं आ रहे और ऐसे हालात में न्यायालय ही एक बेहतर माध्यम हो सकता है। सीएम मोहन पाराशर ने न्यायालय के आधार पर हक लेने, इसके लिए जनता को जागरुक करने, आंदोलन करने के लिए रूपरेखा तय करने का सुझाव रखते हुए एक समिति बनाने की बात कही। सेवानिवृत्त अधिकारी लक्ष्मण सुंदेशा ने भी इस बात पर सहमति जताई और कहा कि इतिहास रहा है कि बांध के पानी के मामले में जालोर की जनता के साथ धोखा हुआ है और यहां के जनप्रतिनिधि भी इसके लिए मजबूत पैरवी नहीं कर पाएं है। ऐसे में पाली ने यह मान लिया है कि जवाई पर केवल उनका ही हक है। ऐसे में जवाई पर हक के लिए लंबी लड़ाई लडऩे की जरुरत है।
बिना जालोर की सहमति के निर्णय क्यों
हाल ही में बाली विधायक द्वारा सोजत, रोहट और सुमेरपुर में जवाई बांध का पानी डालने के प्रोजेक्ट की पोस्ट पर सेवानिवृत्त एसई बीएल सुथार ने आक्रोश जताया।उन्होंने कहा कि जब यह मामला जालोर से भी जुड़ा है तो इस तरह के बड़े निर्णय लेने से पहले जालोर की जनता और अधिकारियों से परामर्श नहीं लेना समझ से परे है। उन्होंने कहा कि बाढ़ आने पर ही जवाई से जालोर को पानी दिया जाता है, जबकि जालोर का इस पानी पर बराबर का हक है। सेवानिवृत्त एक्सईएन लक्ष्मण सुंदेशा ने कहा कि जवाई बांध पुनर्भरण प्रोजेक्ट से पानी आएगा तो ही पानी मिलेगा यह मानसिक गलत है और इन हालातों में जालोर का जवाई से जुड़ा बड़ा क्षेत्र नष्ट हो चुका है।
वरिष्ठजन बैठक में बोले-मजबूत हो पैरवी
बैठक में न्यायालय की शरण में जाने से पूर्व पानी के लिए मजबूत पैरवी के लिए आधार निर्धारण करने पर चर्चा हुई। अधिवक्ता मधुसूदन व्यास ने कहा कि बांध से जालोर के नदी के आस पास के कृषि कुएं (चाही क्षेत्र) को काफी नुकसान हुआ और यह उपजाऊ क्षेत्र पानी में खारेपन के कारण नष्ट हो रहा है। भभूतराम सोलंकी ने भी इस बात पर सहमति जताई और कहा कि जालोर जिले के जवाई से जुड़े कृषि क्षेत्रऔर पाली के सुमेरपुर क्षेत्र के कृषि क्षेत्रका आकलन भी न्यायालय में पीएसआई में पेश किया जा सकता है। जिससे साफ हो जाएगा कि जालोर का बड़ा कृषि क्षेत्रहै जो जवाई बांध से नियमित पानी नहीं मिलने से प्रभावित हो रहा है।
भूजल स्तर भी मजबूत आधार
लक्ष्मण सुंदेशा ने कहा कि जवाई बांध से पाली जिले को पूरी तरह से फायदा हुआ है और जालोर का इससे विनाश ही हुआ है।जनहित याचिका में 196 5 से लेकर वर्तमान में जालोर जिले के न दी के बहाव क्षेत्र और पाली जिले में भूजल स्तर की तुलनात्मक रिपोर्ट भी पेश की जा सकती है। जिसमें साफ हो जाएगा कि इन सालों में जालोर में भूजल स्तर को कितना नुकसान पहुंचा। मदनराज बोहरा ने कहा कि जवाई बांध जालोर जिले की जरुरत है। बोहरा ने कहा कि सरकार जल स्वावलंबन के माध्यम से भूजल स्तर सुधारने का प्रयास कर रही है तो नदी में निर्धारित मात्रा में हर साल पानी छोड़कर जालोर जिले मेें कृषि कुओं का जलस्तर बढ़ाकर इस मंशा को पूरा किया जा सकता है। अधिवक्ता केशव व्यास ने कहा कि जवाई के मामले में जालोर की जनता ही नहीं नेता भी मौन धारण किए हुए है। ऐसे में एक जनहित याचिका भौगोलिक, क्षेत्रीय और मानवीय आधार पर पेश की जाए, जिसमें अब तक के प्रयासों और मांगों को समावेशित किया जाए।
जवाई के पानी के लिए ये हुए निर्णय
- जवाई बांध से जालोर के लिए पानी की मात्रा निर्धारण के लिए एक संघर्ष समिति की स्थापना
- जवाई बांध के पानी पर हक निर्धारण के लिए न्यायालय की शरण
- जालोर, सायला, बागोाड़ा एवं आगे सांचौर तक के गांवों के प्रभावित एवं 122 गांवों के किसानों को सिंचाई का अधिकार प्रदान करते हुए अधिसूचना जारी करने की मांग
- 45 फीट तक जवाई बांध के क्रिस्ट एरिया में भी जालोर के लिए पानी की मात्रा निर्णारण हो





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