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नेताओं की कमजोर पैरवी से जवाई पर कब्जा जमा रहा पाली

जालोर. जवाई बांध पर जालोर के हक निर्धारण के मामले में किसान नेता भी पत्रिका की मुहिम में सहभागी बने। किसान नेताओं का कहना है कि पिछले 50 सालों से जालोर की जनता के साथ छलावा हो रहा है और पाली जिला लगातार इस बांध से अपने जिले के लिए प्रोजेक्ट बना रहा है।वहीं जालोर की ओर से बांध के पानी पर हक निर्धारण के लिए आज तक केाई प्रयास तक नहीं हुए।इस स्थिति के लिए जालोर के जनप्रतिनिधि मुख्य रूप से जिम्मेदार रहे।चाहे कांगे्रस के प्रतिनिधि हो या भाजपा के जनप्रतिनिधि दोनों ने ही इस मुद्दे को केवल चुनावी वोट बैंक के रूप में ही उपयोग किया। धरातल पर इसके लिए कोई सकारात्मक प्रयास नहीं हुए। अब पाली जिले के जनप्रतिनिधियों की ओर से जो प्रयास किए जा रहे हैं। यदि जालोर की जनता और जनप्रतिनिधियों के मौन से धरातल पर साकार हो गया तो जालोर का विनाश निश्चित है। ऐसे में अब समय आ गया है कि सत्ता प क्ष और विपक्ष जालोर के इस अहम मुद्दे पर एकजुट हो और मजबूत पैरवी कर जालोर के लिए पानी का हक निर्धारित करवाए।
जो भी सरकार में रहा पैरवी नहीं हुई
जवाई के मामले में जालोर का इतिहास बहुत ही खराब रहा है। चाहे सत्ता में भाजपा रही हो या कांगे्रस दोनों ही दल के नेताओं ने जालोर के हक की लड़ाई सही तरीके से नहीं लड़ी न ही इसके लिए आज तक कोई व्यापक आंदोलन की रूपरेखा तक तय की। केवल चुनावी घोषणा पत्रों और जनता को लुभाने के लिए बांध से पानी के लिए घोषणाएं की गई, जिसका नतीजा वर्तमान में देखने केा मिल रहा है।
फायदे से ज्यादा नुकसान
बांध से तालाब भरने के प्रोजेक्ट से जितना पाली जिले को फायदा नहीं होगा, उससे कई गुना अधिक तो जालोर जिले को नुकसान हो जाएगा। पूरा क्षेत्रसूख जाएगा और कुंओं में थोड़ा बहुत पानी बचा है वे पूरे खाली हो जाएंगे। राजनीतिक अदूरर्शिता और जालोर के जनप्रतिनिधियों की ढिलाई और मौन के चलते ये हालात बन रहे हैं।
- रतनसिंह कानीवाड़ा, किसान नेता
जालोर जिले के हालात बहुत ही विकट है, जालोर डार्क जोन में है। पिछले 50 सालों में जवाई बांध से नदी में छोड़े जाने वाले प ानी की मात्रा बहुत कम रही है। ये हालात नेताओं की कमजोर पैरवी से हुई। पाली जिला लगातार जवाई बांध से जुड़े प्रोजेक्ट बनाकर अपने क्षेत्रों में अधिक से अधिक पानी पहुंचा रहा है, जबकि हालात यह है कि जवाई नदी के बहाव में आने वाले जालोर जिले के किसानों को इसका पानी नहीं मिल रहा है और कुएं सूख गए हैं।
- प्रताप आंजणा, किसान नेता
जिस प्रोजेक्ट के लिए प्रयास चल रहे हैं वह जालोर के विनाश का कारण बन सकता है। वर्तमान में जवाई के 22 कमांड गांवों तक भी पानी नहीं पहुंच पा रहा है और बांध के निर्माण के बाद से जालोर का काफी बड़ा एरिया ड्राय हो चुका है। सरकारी और राजनीतिक स्तर पर ऐसे प्रोजेक्ट रोकने और बांध से जालोर के हक के पानी के लिए प्रयास होने चाहिए।
- ईश्वरसिंह थुंबा, किसान नेता



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