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न्यूरो चिकित्सक एक पखवाड़े की छुट्टी पर, मरीजों की जान सांसत में

झालावाड़. मेडिकल कॉलेज व एसआरजी चिकित्सालय में न्यूरो विभाग में भर्ती मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। न्यूरो विभाग के चिकित्सक के 15 दिन के अवकाश पर जाने से मरीजों की जान सांसत में आ गई आई है।
जिले में मेडिकल कॉलेज होने के बाद भी न्यूरो विभाग में एक ही चिकित्सक है,वह भी अवकश पर चले जाने से मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। ऐसे में शुक्रवार को मरीजों को घर जाने के लिए बोल दिया गया। जबकि वार्ड में भर्ती 22 मरीजों में से कई गंभीर बीमारियों से ग्रसित है। जिनके ड्रिप भी लगा रखी है। लेकिन शुक्रवार को किसी भी चिकित्सक के नहीं आने से मरीजों की ड्रीप खोलकर उन्हें घर जाने के लिए कहा गया है। ऐसे में मरीजो के परिजनों के सामने परेशान खड़ी हो गई है, कई मरीजों की हालत गंभीर होने के कारण परिजन उन्हें घर भी नहीं ले जा सकते है। ऐसे में परेशानी दुविधा में पड़ गए आखिर करें तो क्या करें। कई गरीब परिवार के होने से दूसरे चिकित्सालय मेें भी नहीं ले जा सकते हैं।वहीं कुछ परिजनो ंने डिस्चार्ज बनाने के लिए कहा लेकिन बिना चिकित्सक के डिस्चार्ज भी नहीं बनाया गया है। ऐसे में परिजन मरीज को दूसरे चिकित्सालय में भी नहीं ले पाए है। परिजनों ने इस संबंध में जिला कलक्टर को ज्ञापन भी सौंपा, फिरभी कोई समाधान नहीं हुआ है। न्यूरो सर्जरी विभाग में तैनात चिकित्सक डॉ.रामवतार मालव 15 दिन के अवकाश पर गए है। इसके चलते न्यूरो वार्ड में भर्ती मरीजों को अन्य सर्जरी विभाग के वार्ड में भर्ती करने या अन्य जगह ले जाने के लिए नर्सिंग कर्मियों ने बोला है।
इसलिए नहीं आना चाहते चिकित्सक
न्यूरो विभाग में कोई सर्जन नहीं आना चाहते हैं। क्योंकि झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में अन्य शहरों के अलावा कम वेतन दिया जा रहा है। वहीं चिकित्सक को प्रोफेसर बनाए जाने सहित अन्य सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही है। सूत्रों ने बताया कि मौजूद चिकित्सक के साथ भी प्रोफसर बनाने का मामला खटाई में चल रहा है। इसे हालात में यहां कोई नहीं आना चाहता है।
& किसी को कोटा या घर जाने के लिए नहीं कहा है। न्यूरो सर्जन डॉ. रामवतार मालव बिना बताए 15 दिन के अवकाश पर चले गए है। इससे मरीजों को सामान्य सर्जरी विभाग में भर्ती कर रहे हैं।
डॉ.राजन नंदा, अधीक्षक, एसआरजी चिकित्साल, झालावाड़
& जिस डॉक्टर को बताया था वह छूट्टी पर चले गए है। नर्सिंग स्टाफ ने कहा कि एक कागज पर लिख दो। मरीज जिए या मरे हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं। हमारे पास आगे ले जाने के पैसे भी नहीं है। तो कई मरीज गंभीर भी है ऐसे में अब क्या करें। सरकार एक तरफ तो नि:शुल्क इलाज का दावा कर रही है। यहां इलाज ही नहीं मिल रहा।
फखरूद्दीन, मरीज के परिजन, झालावाड़

 



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