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सत्ता पक्ष बोला : जालोर के हक के लिए लड़ेंगे

जालोर. जवाई बांध पर अधिनायक मंशा से पाली जिले के जनप्रतिनिधियों की ओर से नए प्रोजेक्ट की क्रियान्विति की मंशा का जालोर में विरोध जारी है। इस मामले में जहां कांगे्रस के जनप्रतिनिधि पूर्व मेें ही विरोध जता चुके हैं और आंदोलन की चेतावनी भी दी है। वहीं पत्रिका की ओर से इस मामले को उठाने के बाद जिले के प्रबुद्धजनों,अधिवक्ताओं सेवानिवृत्त इंजीनियर्स की बैठक में जवाई पर जालोर का हक निर्धारण करने के प्रयास और इसके लिए न्यायालय की शरण में जाने का निर्णय लिया जा चुका है।यह मामला इसलिए ज्वलंत है क्योंकि वर्तमान ऊर्जा राज्य मंत्री और बाली विधायक ने 31 मई को अपनी फेसबुक पोस्ट में जवाई बांध से 3 हजार एमसीएफटी पानी से रोहट, सुमेरपुर और सोजत के तालाब भरने के प्रोजेक्ट का जिक्र किया। सीधे तौर से इस प्रोजेक्ट से जालोर को नुकसान है। मामले में खास बात यह भी है कि मंत्री ने जालोर के किसी भी जनप्रतिनिधि या इंजीनियर्स से भौगोलिक आंकलन के इस प्रोजेक्ट के लिए प्रयास किए। इस पूरे मामले में कांगे्रस के जनप्रतिनिधि आरोप भी लगा चुके हैं कि भाजपा के प्रभावशाली नेताओं के आगे जालोर के भाजपा पदाधिकारी बौने हैं, यही कारण है कि अब तक न तो जवाई के लिए कोई प्रयास हुए हैं और यहां तक की अब तो हक मारने की नौबत तक आ चुकी है। इस पूरे मामले में जालोर के जालोर, आहोर, भीनमाल विधायकों ने मामले में अपने स्तर पर प्रयास करने और जालोर के हक की आवाज बुलंद करने की हामी भरी है। अब यह बात अहम होगी कि ये नेता अपने जिले के 20 लाख आबादी की आवाज किस तरह से बुलंद कर पाते हैं।
अब मौन पड़ेगा भारी
1952 में बांध निर्माण के बाद से ही जालोर की जनता और जनप्रतिनिधियों का मौन भारी पड़ा है और वर्तमान में पाली ने इस पानी को केवल अपना अधिकार क्षेत्र मान लिया है। जबकि राइपेरियन राइट के अनुसार इस पर जालोर के जवाई नदी के मुहाने के किसानों का अधिकार कई गुना अधिक है।
बांध के पानी के लिए पाली जिले की ओर लगातार नए प्रोजेक्ट बनते गए, जिसका जालोर की जनता और न ही जनप्रतिनिधियों की ओर से विरोध किया गया।नतीजा जवाई का बड़ा भाग पाली जिले को मिल रहा है।यही नहीं जवाई बांध पर कोई नया प्रोजेक्ट स्वी$कृति पर रोक के बावजूद पाली जिले के जनप्रतिनिधि अपने राजनीतिक पॉवर का उपयोग कर उनकी जबरन क्रियान्विति का प्रयास करवा रहे हैं।
हर संभव प्रयास करेंगे
जवाई नदी को जीवित रखने को हर संभव प्रयास करेंगे। यह लाजमी है कि हर व्यक्ति अपने क्षेत्र की जनता के लिए प्रयास करता है। जिला प्रशासन के मार्फत जवाई पर हक निर्धारित करने के लिए सरकार को पत्र भेजा जाएगा।वहीं संभागीय आयुक्त से भी आगामी कुछ दिनों में मिलकर इस संबंध में अवगत करवाएंगे।
- शंकरसिंह राजपुरोहित, एमएलए, आहोर
सीएम से मिलेंगे
जवाई बांध पर केवल पाली जिले का हक नहीं है। इससे जालोर जिले का बहुत बड़ा क्षेत्र प्रभावित होता है और इस पानी पर जालोर का हक है। कोई भी एक व्यक्ति इस बांध के पानी पर अधिकारक्षेत्र के लिए प्रोजेक्ट बनाए यह किसी भी तरह से ठीक नहीं है। जालोर के हक निर्धारण के लिए के लिए मुख्यमंत्री से मिलेंगे।
- अमृता मेघवाल, एमएलए, जालोर
जालोर का हक
जवाई नदी के पानी पर जालोर जिले का हक है और बांध से जुड़े किसी भी प्रोजेक्ट की क्रियान्विति बिना सहमति से नहीं बनाई जानी चाहिए। इस बांध से हालांकि सीधे तौर से जालोर और आहोर का बड़ा क्षेत्र प्रभावित होता है।
- पूराराम चौधरी, एमएलए, भीनमाल



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