केस- 1 : पत्रिका टीम ने शनिवार को ग्राम पंचायत बडारड़ा का निरीक्षण किया। यहां छह कामों के लिए १३१ श्रमिकों का मस्टररोल कागजों में जारी बताया गया है। जबकि मौके पर महज एक काम चल रहा था, और वहां १३ श्रमिक ही काम करते नजर आ रहे थे।
केस- 2 : ग्राम पंचायत पीपरड़ा में मनरेगा के तहत ११८ श्रमिकों के साथ दो कामों को दिखाया गया है। मौके पर एक ही काम चल रहा था, उसमें भी ४० श्रमिक ही काम कर रहे थे।
राजसमंद. जिम्मेदार अधिकारी सरकार द्वारा रोजगार के साथ विकास के दावे को गलत साबित कर रहे हैं। दरअसल प्रत्येक जिले में जिम्मेदार जिलापरिषद के अधिकारियों को सरकार द्वारा लक्ष्य दिया गया कि मई और जून माह में अधिक से अधिक लोगों को लाभ देकर रोजगार दिलाएं। उस लक्ष्य को पूरा करने के लिए आलाअधिकारी कागजों में खानापूर्ति करके ऑनलाइन में सैकड़ों श्रमिकों के आवेदन कर देते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कासों दूर हैं। आकड़ेे के खेलों की जब पत्रिका टीम ने पड़ताल की तो स्थिति चौकाने वाली सामने आई।
काम शुरू ही नहीं हुए
पंचायत में लगे कार्मिकों द्वारा खानापूर्ति के लिए कई कामों को ऑनलाइन दिखा दिया जाता है जबकि मौके पर काम शुरू भी नहीं होता। साथ ही श्रमिकों की संख्या कम होने पर भी काम की साइड ज्यादा बता दी जाती है।
मस्टरोल जारी, लेकिन काम नहीं
पत्रिका की पड़ताल में यह भी सामने आया कि ऐसी भी ग्राम पंचायतें है, जहां मस्टररोल के साथ कई काम जारी कर दिए गए, लेकिन वहां अबतक काम का ही अता-पता नहीं है।
यहां भी ऐसी स्थिति
इसी तरह साकरोदा, सांगठकला एवं कई पंचायतों की पड़ताल में जिला परिषद के ऑनलाईन आंकड़ों से काफी कम श्रमिक ही काम पर मौजूद मिले।
सख्त कार्रवाई की जाएगी..
कई पंचायतों में ऐसी स्थिति बनी हुई है, यह मामला पूरा ध्यान में है। प्रत्येक पंचायत का निरीक्षण कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह पूरी कोशिश रहेगी कि जो आकड़े ऑनलाईन में दर्ज हों, उतने ही मजदूर मौके पर मिलें।
गोविंद सिंह राणावत, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिलापरिषद





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