इन दिनों अलवर शहर में जनता के विकास के पैसे की बर्बादी चरम पर है। विभागों में आपसी तालमेल नहीं होने और शहर के विकास का कोई सुनियोजित योजना नहीं बनने के कारण कहीं सड़क पर सड़क बनाने की तैयारी हेै। कुछ दिनों पहले लगी इंटरलॉकिंग टाइल्स को उखाड़ा जा रहा है। इस तरह लाखों-करोड़ों रुपया जनता का विकास के नाम पर बर्बाद हो रहा है। आप देख रहे हैं कभी सीवरेज लाइन डालने के नाम पर सड़क तोड़ी गई फिर उसे ठीक किया गया। कुछ दिन बाद ही पानी की लाइन डालने वालों ने सड़क तोड़ दी।
फिर कोई निजी टेलीकॉम एजेंसी ने अपनी अलग से लाइन डालने के लिए खुदाई कर दी। यह सिलसिला दो साल से चलता आ रहा है। सरकार या विभाग चाहते तो एक बार सड़क को तोड़कर सभी तरह की लाइनें डाली जा सकती हेैं ताकि बार-बार न सड़क तोड़ी जाए न जनता परेशान हो। यही नहीं ऐसी कोई प्लानिंग भी नहीं है जिसमें शहर का आगामी पांच या दस साल की तैयारी हो।
स्कीम आठ में तोड़ रहे टाइल्स
इन दिनों सकीम आठ में इंटरलॉकिंग टाइल्स उखाड़कर पानी की लाइन डाली जा रही है जबकि एक-दो महीने पहले ही सड़क के किनारे इंटरलॉकिंग टाइल्स लगी हैं जिस पर लाखों रुपया खर्च हुआ है। अब नई खुदाई करने के कारण अधिकतर टाइल्स टूट रही है। लाइन डालने के बाद फिर से टाइल्स लगाई जाएंगी। ऐसा नहीं होता है तो पहले से लगी टाइल्स उखड़ जाएंगी।
जहां लाइन डाली वहां कुछ नहीं
शहर में ऐसी न जाने कितनी रोड हैं जो टूटी पड़ी हैं। उनकी सुध नहीं ली जा रही है। दूसरी ओर अच्छी खासी सड़कों को तोड़कर दुबारा बनाया जा रहा है। हाल में नेहरू गार्डन से अशोका टाकीज तक नई सड़क बनाने पर 1.45 करोड़ खर्च करने की तैयारी हो गई जबकि यह सड़क ज्यादातर सलामत है।
एक ही एजेंसी के जरिए कार्य हों
यूआईटी शहर के विकास का ढांचा तैयार करती है। इसी एजेंसी के जरिए आगामी 10 साल की योजना बने। जितनी भी लाइनें डाली जानी हैं उनकी तैयारी हो। सब विभागों से इसकी रिपोर्टिंग हो ताकि बार-बार न सड़कें तोड़ी जाएं न जनता को धक्के खाने पड़े। अभी हर विभाग अपनी मनमर्जी से सड़कों को तोड़ रहा है। जिम्मेदार विभाग भी उनको टोक नहीं रहे हैं। वे बिना अनुमति मन चाहे जहां से सड़कों को खोद कर पटक देते हैं जबकि आम आदमी एक छोटी सी जगह को तोडऩे की अनुमति लेने के लिए सालों परेशान
होता है।





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