खुशालसिंह भाटी @ जालोर. जालोर जिले में एक बड़े कृषि क्षेत्र की जीवन रेखा माने जाने वाले जवाई बांध पर राजनीतिकरण का असर देखने को मिल रहा है। यदि इस मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधि सजग नहीं हुए तो जवाई बांध से जालोर जिले की जवाई नदी में बहाव भविष्य में एक सपना ही होगा।यही नहीं ढिलाई के चलते यदि भविष्य में जवाई पुनर्भरण योजना साकार रूप भी ले लेती है तो जालोर को इस बांध से पानी तक नहीं मिल पाएगा। यह स्थितियां इसलिए बन रही है कि वर्तमान में ऊर्जा मंत्री और बाली विधायक पुष्पेंद्रसिंह राणावत जवाई बांध से जुड़े एक ऐसे प्रोजेक्ट के लिए प्रयास कर रहे हैं, जो जालोर जिले के लिए पूरी तरह से नकारात्मक तो है ही।साथ ही भौगोलिक दृष्टि से भी अनुपयोगी है। प्रोजेक्ट के अनुसार जवाई बांध के एक तिहाई पानी से सोजत, रोहट और सुमेरपुर में तालाबों मेंं पानी पहुंचाने का प्रस्ताव है। जो पूरी तरह से अनुपयोगी है।वहीं इतने बड़े हिस्से का उपयोग यदि केवल तालाबों को भरने में कर दिया जाएगा तो भविष्य में जवाई बांध से नदी में पानी का बहाव नामुमकिन हो जाएगा।
तकनीकी दृष्टि से भी अनुपयोगी
यह मामला अभी विचाराधीन चल रहा है, लेकिन जालोर जिले के किसानों के लिए यह खतरे का संकेत है। मामले में पत्रिका ने जवाई बांध के सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता ने चर्चा की तो उन्होंने प्रोजेक्ट को नकारात्मक बताया। साथ ही कहा कि जब पानी बांध में ही है तो उसे तालाब तक ले जाना औचित्यविहीन है। साथ ही तालाब बरसात में भरते हैं और कुछसमय बाद सूख भी जाते हैं।ऐसे में पानी पहुंचाया भी जाएगा तो कुछ ही समय में तालाब सूख जाएंगे। प्रोजेक्ट के अनुसार सीधे तौर पर 3 हजार एमसीएफटी पानी का दुरुपयोग है। इससे बेहतर होगा कि यदि जरुरत है तो पाइप लाइन के जरिए पानी को निर्धारित स्थान तक ले जाया जाए।
फायदा पाली का नुकसान जालोर को
हर साल जवाई बांध से प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान उठाना पड़ता है। बांध में बारिश के बाद अच्छी आवक नहीं होने पर नदी में पानी छोड़ा ही नहीं जाता, जिससे किनारे के किसानों के खेत में कुएं सूख जाते है। वहीं इस स्थिति में भी पाली जिले को पीने के लिए पानी दिया जाता है।दूसरी तरफ जब हालात बाढ़ के हो तो जालोर जिले को खतरे में डालकर एक साथ पानी छोड़ा जाता है। जैसा कि वर्ष 2017 और 2006 में छोड़ा गया।
इतने पानी में ३५० सुंदेलाव भर सकते हैं
यह प्रोजेक्ट जालोर जिले के लिए भविष्य में खतरनाक साबित हो सकता है। इसकी भयावहता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इस पानी से जालोर के सुंदेलाव तालाब 350 बार भर सकता है।
धरातल पर कारगर नहीं हो सकता
&जवाई बांध से तालाब भरने का प्रोजेक्ट किसी भी तरह से उपयोगी नहीं माना जा सकता। तालाब बरसात में भरने के अनुसार ही बनाए हुए हैं। ऐसे में पानी का भराव करने के कुछ ही समय बाद ये पानी सूख जाएगा। इससे बेहतर है जवाई बांध में ही पानी का स्टॉक रखा जाए।वहीं कहीं जरुरत भी है तो पाइप लाइन के जरिए पानी ले जाया जाना चाहिए और टैंक में पानी भरा जाना चाहिए। वर्तमान मिट्टी पानी सोख लेगी और जवाई के बड़े हिस्से का सीधे तौर से दुरुपयोग होगा। वहीं यह जवाई पुनर्भरण प्रोजेक्ट की मंशा के विपरीत ही है।
- एसएल परमार, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता, जल संसाधन
जिले के लिए नुकसान
&मुझे भी मामले के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है, लेकिन यदि इस प्रोजेक्ट की क्रियान्विति हेाती है तो जालोर को सीधे तौर पर नुकसान है।
- रविंद्रसिंह बालावत, जिलाध्यक्ष, भाजपा





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