चित्तौडग़ढ़. चित्तौड़ दुर्ग स्थित मृगवन को बंद करने का मामला केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री तक पहुंचने के दो साल बाद भी इसे खुलवाने या फिर यहां बॉयोलोजिकल पार्क बनाने की दिशा में सांसद के प्रयास रंग नहीं ला सके हैं, इसकी वजह यह है कि राज्य सरकार की ओर से अब तक इस संबंध में केन्द्र को प्रस्ताव नहीं भिजवाए गए है।
दुर्ग स्थित मृगवन का रिलोकेशन सेंटर के रूप में ही आज से करीब सैंतालीस बरस पहले उद्घाटन किया गया था। यहां रखे गए सांभर-चीतल के लिए वर्ष १९९६ से पहले बजट गुलाब बाग उदयपुर से आता था। यहां वन विभाग के तत्कालीन डीएफओ ने इस सोच के साथ केन्द्रीय चिडिय़ाघर प्राधिकरण के साथ पत्राचार किया था कि प्राधिकरण से इसे मान्यता मिल जाएगी तो और अधिक बजट मिल सकेगा, लेकिन इस पत्राचार में कहीं ऐसा उल्लेख हो गया कि मृगवन में दस हैक्टेयर जमीन है। इसी उल्लेख के चलते करीब दो साल पहले मृगवन पर ताले लगवा दिए। जबकि हकीकत यह है कि मृगवन का फैलाव दस नहीं बल्कि पैंतीस हैक्टेयर यानी १४५ बीघा क्षेत्र में है।
मृगवन को बंद करने के केन्द्रीय चिडिय़ाघर प्राधिकरण के आदेश को लेकर सांसद सीपी जोशी ने दिल्ली में उच्च अधिकारियों और संबंधित मंत्री से बात की थी, तब यह बात सामने आई कि मृगवन में १० हैक्टेयर जमीन होना ही बताया गया है। सांसद ने इन अधिकारियों को मृगवन के वास्तविक फैलाव क्षेत्र के बारे में भी बताया था। इसके बाद यहां के डीएफओ ने तथ्यात्मक रिपोर्ट बनाकर विभाग के उच्च अधिकारियों को भी भिजवाई थी। यहां तक कि सांसद ने यहां बॉयोलोजिकल पार्क बनाने की मांग भी पुरजोर तरीके से की थी, लेकिन दो साल बाद भी सांसद के प्रयास रंग नहीं ला सके। यही वजह है कि पिछले करीब दो साल से मृगवन पर ताले लगे हुए हैं।
गौरतलब है कि दुर्ग स्थित मृगवन रिलोकेशन सेन्टर के नाम से साढ़े चार दशक पूर्व 35 हैक्टेयर क्षेत्र में आरम्भ हुआ था। मृगवन हरा-भरा एवं पानी के स्त्रोतों से सम्पूर्ण है। यहां पर चीतल, सांभर रहते हंै, जिनकी संख्या में वृद्वि होती रहती हंै और इनको अन्यत्र भी भेजा जाता है। दुर्ग स्थित रिर्जव फोरेस्ट क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए मृगवन का विकास हुआ है। यह चिडिय़ाघर नहीं होकर खुला क्षेत्र है, जहां जानवरों के लिए पर्याप्त स्थान, खाना-पानी प्राकृतिक रूप से उपलब्ध रहता है। फिर भी केन्द्रीय चिडिय़ाघर प्राधिकरण नई दिल्ली ने मृगवन पर ताले लगवा दिए। जबकि मृगवन रिलोकेशन सेंटर है और यह चिडिय़ाघर नहीं होकर एक खुला क्षेत्र है। इसलिए इसको चिडिय़ाघर नहीं मान सकते।
राज्य सरकार भेजेगी प्रस्ताव
मृगवन के मामले में केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री से बात हो चुकी है। बॉयलोजिकल पार्क के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार की ओर से केन्द्र को भिजवाया जाना है। अब तक प्रस्ताव नहीं आने से विलंब हो रहा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री से बात की है। राज्य सरकार जल्द ही प्रस्ताव भिजवा देगी।
सीपी जोशी, सांसद चित्तौडग़ढ़





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