कोटा.
मानसून ने दस्तक देने के साथ ही कोटा पर मेहरबानी शुरू भी कर दी है। यहां दो दिन से रुक-रुककर तेज और रिमझिम बारिश से नदी-नाले व झरने बहने लगे हैं। पिकनिक स्पॉट पर शौकीनों की चहल-पहल बढ़ गई है, लेकिन प्रकृति की गोद में स्थित यह पिकनिक स्पॉट मौज-मस्ती व मनोरंजन में खलल पैदा कर सकते हैं, क्योंकि यहां सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी हैं। कुछ पिकनिक स्पॉट पर सिविल डिफेंस के स्वयंसेवक लगाए गए हैं, लेकिन खाली हाथ। उन्हें आपदा राहत व बचाव के लिए संसाधन तक मुहैया नहीं कराए गए। राजस्थान पत्रिका ने दो दिन की बारिश के बाद शुक्रवार को डायवर्जन चैनल, गेपरनाथ, भंवरकुंज आदि पिकनिक स्पॉट पर सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया तो स्थिति अच्छी नहीं दिखी।
डायवर्जन चैनल : सुरक्षा गार्ड नहीं
बारिश के दौरान पठारी क्षेत्र का पानी डायवर्जन चैनल से होते हुए भंवरकुंज पहुंचता है। इस बीच चट्टानी क्षेत्र है, जहां लोग पिकनिक मनाने व नहाने आते हैं। पत्रिका टीम जब वहां पहुंची तो कुछ लोग चट्टान पर बैठे थे। बच्चे नहा रहे थे, लेकिन सुरक्षा के नाम पर कोई गार्ड तैनात नहीं था। गौरतलब है कि यहां सबसे ज्यादा खतरा रहता है। यहां अचानक पानी का बहाव आता है, जिससे कभी भी हादसा हो सकता है। गुरुवार रात हुई बारिश के बाद यहां पानी का बहाव तेज हो गया।
गेपरनाथ : कोई रोक-टोक नहीं
कोटा से 32 किमी दूर गेपरनाथ पर आपदा प्रबंधन के लिए दस सदस्यों की सिविल डिफेंस की टीम तैनात की गई है। यहां पांच सदस्य ऊपर व पांच नीचे तैनात हैं। बारिश होते ही गेपरनाथ का झरना बहने लगा है। इस झरने के नीचे पेड़ है। यहां बच्चे व बड़े पेड़ों पर झूल रहे थे, लेकिन मौजूद स्वयंसवेकों ने उन्हें ऐसा करने से नहीं रोका। यदि किसी के हाथ से पेड़ की डाल छूट जाए तो वह सीधे नीचे कुण्ड में गिर सकता है। सिविल डिफेंस टीम के पास बचाव के उपकरण व रस्सी तक नहीं थी।
भंवरकुंज : बचाव के संसाधन नहीं
भंवरकुंज पिकनिक स्थल सबसे खतरनाक है। यहां हर साल पानी में डूबने से हादसे होते रहते हैं। बावजूद इसके प्रशासन सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। गुरुवार रात बारिश के बाद भंवरकुंज में पानी का बहाव आ गया, लेकिन सिविल डिफेंस के सदस्यों के पास बचाव के लिए कोई संसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
हमारी नहीं सुनते लोग
सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों ने बताया कि हम लोगों को खतरे के प्रति आगाह करते रहते हैं, लेकिन वह हमारी नहीं सुनते। शराब पीने वाले कुछ लोग जान जोखिम में डालकर मौज-मस्ती करते हैं। उन्हें रोकते हैं तो वह झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। ऐसे में सुरक्षा के लिए पुलिस भी तैनात की जानी चाहिए।
ये संसाधन मिलते हैं -
लाइफ जैकेट - बड़ी व मोटी रस्सी - लाइफ रिंग
हो चुके हादसे - पिछले सालों में भंवरकुंज में महिला अरुणा कौशल, चार इंजीनियरिंग छात्र, दो दोस्तों को बचाने उतरे छावनी निवासी राजू की डूबने से मौत हो चुकी है। - गेपरनाथ में 2005-06 में दो बच्चों व 2016 में तालेड़ा निवासी एक युवक डूब गया था।
(जैसा कि गोताखोर विष्णु शृंगी ने बताया)





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