ओम माली@बाड़मेर. अभाव, संघर्ष और परिस्थितियों का विकट होना। धापू की बेनूर आंखों ने सत्रह साल में यह सब देखा और आज बारहवीं कला का नतीजा आया तो नजीर बन गई। धापू बाड़मेर के डण्डाली गांव की है। उसके पिता राऊराम, तीन चाचा मुकनाराम, उमाराम, मलाराम, मां टीपूदेवी और भाई जगदीश सभी दृष्टिबाधित है। परिवार में इतने लोगांे के जीवन में अंधेरा है।
परिवार की माली हालत कमजोर और दूर ढाणी से स्कूल आने जाने की मजबूरी के बावजूद उसने पढ़ाई नहीं छोड़ी। गांव में छठी तक की पढाई के बाद बाड़मेर शहर के मूक, अंध, बधिर विद्यालय पढऩे आई। दसवीं 70.50 अंक से उत्तीर्ण की और बारहवीं कलावर्ग के शुक्रवार को आए नतीजों में 68.20 प्रतिशत अंक से उत्तीर्ण हो गई। धापू की बेनूर आंखों में शुक्रवार को अलग ही चमक थी। वह कहती है कि शिक्षक बनूंगी और अब तो मैं भी पढ़ाऊंगी। शिक्षक ही क्यों बनेंगी तो जवाब है कि उसे पढाना अच्छा लगता है। वह दृष्टिबाधित ही नहीं सामान्य बच्चों को भी पढ़ा सकती है।
वहिया खां ने की स्कूल टॉप
बाड़मेर के देरासर गांव का वहियाखां दृष्टिबाधित है। उसने 85.20 प्रतिशत अंक हासिल किए हंै। उसने बाड़मेर की स्टेशन रोड स्कूल में टॉप किया है। वहिया के पिता गुलामखां सामान्य किसान है। वह कहता है कि उसका सपना आईएएस बनना है और इसके लिए पूरी मेहनत करेगा।
इन्होंने भी किया कमाल
स्टेशन रोड स्कूल में अध्ययनरत दृष्टि बाधित जब्बरसिंह ने 81.40, मोहम्मदखां 75.80, रसाल खां 78.20, अमरूद्दीन 76.20 प्रतिशत से उत्तीर्ण हुए है।
शिक्षा की रोशनी
दृष्टिबाधित विद्यार्थियों ने कमाल किया है। पूरी मेहनत के साथ आगे बढ़े हैं। गौरव है कि विद्यालय टॉप एक दृष्टिबाधित ने किया है। - चैनाराम चौधरी, प्रधानाध्यापक स्टेशन रोड़ स्कूल
144 सरकारी स्कूलों का परिणाम 100 प्रतिशत
शिक्षा की दृष्टि से पिछड़ा माने जाने वाला बाड़मेर जिला लगातार कमाल कर रहा है। इस बार बारहवीं कला के नतीजों में यहां के 144 स्कूलों का परिणाम शत प्रतिशत रहा है। जिले में पहली बार व्याख्याताओं के अधिकतम पद भरे जाने का परिणाम नतीजों में नजर आया है। जिले में 481 सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय है। शत प्रतिशत परिणाम के साथ ही 90 से 99 प्रतिशत परिणाम में भी 250 के करीब स्कूल हंै। इन स्कूलों में एक दो विद्यार्थी ही अनुत्तीर्ण हुए हैं।





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