सवाईमाधोपुर . नगर परिषद सभापति डॉ. विमला शर्मा के खिलाफ अविश्वास मामले में चार पार्षदों के फर्जी पत्रों के शगूफे पर मंगलवार को अविश्वास समर्थित कांग्रेस व भाजपा पार्षदों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने इस मामले में नगर परिषद नेता प्रतिपक्ष गिर्राज गुर्जर ने जिला कलक्टर पीसी पवन से मुलाकात की। साथ ही उनको प्राप्त हुए चार पार्षदों के पत्रों की सत्यता जांचने की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष व अन्य पार्षदों का कहना था कि जिन पार्षदों के जिला कलक्टर सम्मुख अविश्वास पत्र पर फर्जी हस्ताक्षर होने संबंधी पत्र मिलने की बात सामने आई है। असल में वे पार्षद 20 जून को अविश्वास पत्र सौंपने के बाद से ही सवाईमाधोपुर में नहीं है। वे अविश्वास का समर्थन करने वाले पार्षदों के साथ ही है। हालांकि वे भूमिगत चल रहे हैं। जो पार्षद यहां है ही नहीं, वे कैसे अविश्वास पत्र पर हस्ताक्षर फर्जी होने का लेटर कैसे दे सकते हैं।
अविश्वास मामला
वे बोले...सभापति के खिलाफ अविश्वास को लेकर सभी पार्षदों के साथ हैं,
अगर किसी ने उनके नाम से पत्र दिया है तो वह फर्जी है
फर्जी पत्र जारी करने वाले के खिलाफ कार्रवाई करेंगे
चारों पार्षद पेश होने पर होगा बैठक का फैसला
हालांकि इस मामले में जिला कलक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं। जिला कलक्टर ने नेता प्रतिपक्ष को उन चारों पार्षदों को पेश करने को कहा है। कलक्टर के अनुसार इस दौरान पार्षदों की पहचान के बाद उनके पत्रों की सत्यता जांची जाएगी। अगर चारों पार्षद अविश्वास पर फर्जी हस्ताक्षर होने की बात की पुष्टि कर देते हैं तो बोर्ड बैठक नहीं बुलाई जाएगी। क्यों कि अविश्वास का दावा खारिज हो जाएगा।
अगर इनकार करते हैं तो जिला कलक्टर की ओर से बैठक बुलाई जाएगी।
दिनभर मचा रहा बवाल
इस मामले को लेकर दिनभर राजनीतिक हलकों में बवाल मचा रहा। लोग भूमिगत पार्षदों एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों से इसकी जानकारी लेते रहे। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने तीखी टिप्पणी की।
अब तक क्या रही स्थिति
जिला कलक्टर पीसी पवन ने बताया कि अब तक 20 जून को पार्षद उपस्थिति हुए थे। इनमें जो अविश्वास का पत्र सौंपा उसमें 35 पार्षदों के हस्ताक्षर थे। एक अन्य शपथ पत्र पर एक पार्षद के हस्ताक्षर नहीं थे। उस दिन 20-25 पार्षद ही उपस्थित थे। अन्य उपस्थित नहीं हुए। इस बीच 21 जून को चार पार्षदों के लेटर उनको मिले। इसमें बताया गया कि अविश्वास पत्र पर उनके हस्ताक्षर फर्जी है। इसके बाद जिला कलक्टर ने मामले को लीगल एडवाइजर के पास टिप्पणी के लिए भेज दिया है।





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