जालोर. नगरपरिषद सभागार में गुरुवार को शहर के विकास और आमजन की समस्याओं के निस्तारण से जुड़े मुद्दों को लेकर सभापति भंवरलाल माली, उपसभापति मंजू सोलंकी, आयुक्त शिकेश कांकरिया और एईएन महेश राजपुरोहित की मौजूदगी में अति आवश्यक बैठक बुलाई गई। बैठक की शुरुआत में ही उपसभापति ने सवाल दागा कि आखिर इस बैठक में अति आवश्यक क्या था? बोर्ड बने चार साल हो गए हैं, लेकिन एजेंडे में शामिल सभी मुद्दे पहले भी बैठकों में रखे जा सकते थे। इस पर आयुक्त कांकरिया का कहना था कि यह बैठक सभापति की ओर से जारी यूओ नोट के बाद बुलाई गई थी। इस बैठक में नेता प्रतिपक्ष मिश्रीमल गहलोत नजर नहीं आए। ऐसे में विपक्ष की पैरवी कुछ हद तक कमजोर दिखाई दी। इधर, बैठक की शुरुआत में ही सुंदेलाव के सौंदर्यकरण और विकास के मुख्य मुद्दे पर कई पार्षदों ने बेतुके सवाल दागे। सवाल करने वालों को यह तक पता नहीं था कि कांजी हाऊस और गोशाला में फर्क क्या है। कुछ ने पार्कों को गोद लेने के बारे में कमजोर मॉनीटरिंग की शिकायत भी की तो कुछ ने सभापति और आयुक्त पर विकास कार्यों के नाम पर पक्षपात करने के आरोप लगाए। कुल मिलाकर यह बैठक सुर्खियों में तो जरूर रही, लेकिन इसका हश्र ऐसा रहा कि अंत तक अधिकारी और कुछ जनप्रतिनिधि चाहते हुए भी अहम निर्णय नहीं ले पाए।
एजेंडे का बिन्दू-1. सुंदेलाव तालाब का सौंदर्यकरण व विकास के लिए प्रस्ताव आमंत्रित करने के लिए...
नतीजा- बैठक शुरू होते ही उपसभापति ने अति आवश्यक ङ्क्षबदू कौनसे हैं? और आवश्यक हैं भी तो चार साल के कार्यकाल में ये बिंदू कहां गए के बारे में पूछा। इस पर करीब आधा घंटे तक बहस चली। अंत में आयुक्त व सभापति ने बताया कि इसमें परिषद कुछ भी खर्च नहीं करेगी। सब दानदाताओं पर निर्भर रहेगा। इससे तालाब में बगीचा, चारों ओर फुटपाथ व सुरक्षा कवच समेत अन्य कार्य हो सकेंगे। तब ये ङ्क्षबदू नतीजे तक पहुंचा।
एजेंडे का बिन्दू-2. कांजी हाऊस के लिए प्रस्ताव आमंत्रित करने के लिए...
नतीजा- इस मुद्दे पर भी काफी देर तक नगरपरिषद की बैठक में तू-तू-मैं-मैं होती रही। उपसभापति शहर में कुल कितनी गोशालें चल रही हैं, इसका रिकॉर्ड मांग रही थीं तो कोई यह पूछ रहा था कि कांजी हाऊस में गाय-भैंस के बछड़ों या आवारा सांड रखे जाएंगे या नहीं। तभी पार्षद गौतम बोहरा ने गोशाला और कांजी हाऊस में फर्क बताया। बाद में यह मुद्दा भी प्रस्तावित मेला मैदान को छोड़ अन्य कहीं जगह चिह्नित करने की बात पर नतीजे पर पहुंचा।
एजेंडे का बिन्दू-3. जल स्वावलम्बन योजना के कार्यों की समीक्षा व विचार विमर्श...
नतीजा- इस योजना के तहत शहर में ऐसे काम करवाने के लिए प्रस्ताव लेने थे, जिससे जल संरक्षण के साथ पुराने जल स्रोतों का रखरखाव और उपयोग हो सके, लेकिन इस बिंदू पर चर्चा शुरू होते ही उपसभापति सोलंकी ने इसके लिए अब तक मिले बजट की जानकारी मांगी। इस पर कांग्रेस के अन्य पार्षदों ने भी उनका साथ दिया। बाद में आयुक्त व सभापति ने प्रथम चरण में इसके तहत मिले 51 लाख में से खर्च 45 लाख रुपए के उपयोग व दूसरे चरण के लिए स्वीकृत 91 लाख रुपए की जानकारी दी। इसके बाद शहर की बावडिय़ों और सरकारी कार्यालयों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लेकर कार्य करने पर सहमति बनी।
एजेंडे का बिन्दू-4. नगरपरिषद के विभिन्न पार्कों को गोद देने के प्रस्ताव
नतीजा- इस मुद्दे की शुरुआत में भी उपसभापति ने आयुक्त से शहर के सभी पार्कों की सूची मांगी। इसके बाद सेवानिवृत्त कार्मिक मफाराम गर्ग ने इसकी सूचना दी, लेकिन उपसभापति सोलंकी द्वारा मानपुरा कॉलोनी में ज्वाला ऋषि पार्क के लिए १० लाख के ई-टेंडर के बारे में पूछे जाने पर आयुक्त ने बताया कि यह पार्क नया है और उसे डवलप किया जाएगा। इस पर पार्षदों ने यहां पार्क के बजाय पार्किंग की व्यवस्था पर ध्यान देने का सुझाव दिया। इस पर आयुक्त ने कहा कि एजेंडे में पुराने पार्क दानदाताओं को गोद देने के लिए ही बैठक में यह प्रस्ताव रखा गया है।
एजेंडे का अंतिम बिन्दू-5. लेटा ग्राम पंचायत की ओर से जारी पट्टों के नियमन का मामला...
नतीजा- उपसभापति सोलंकी ने इस मामले में भी अपनी एकल आपत्ति जताई। उन्होंने सदन में इसकी घोषणा भी की, लेकिन उनके अलावा किसी ने भी इस मामले में आपत्ति दर्ज नहीं करवाई। कुछ पार्षदों ने यह भी कहा कि पट्टों पर पर पट्टे जारी करने का कोई नियम ही नहीं है। ऐसे में आयुक्त व सभापति का कहना था कि नगरपरिषद सीमा में आने वाले लेटा पंचायत के ऐसे भूखण्डों के नियमन से पहले जांच कर वेरिफिकेशन किया जाएगा। इसके बाद परिषद रिकॉर्ड में इन्हें दर्ज किया जाएग। ताकि उन्हें एनओसी व अन्य सुविधाएं मिल सके।
मुद्दों के विपरीत रोना रोते रहे...
शहर स्थित सुंदेलाव तालाब का विकास एजेंडे का पहला बिंदू था। अगर यह विकसित होता है तो परिषद के लिए आय का मुख्य जरिया भी बन सकता है। इस पर बेहतर रायशुमारी के बजाय पार्षद गंदे पानी की निकासी, बारिश से सम्भावित नुकसान और अब तक तालाब के लिए खर्च राश पर रोना रोते रहे। बाद में पार्षद गौतम बोहरा ने सभी को मिलकर इस बारे में सकारात्मक पहल करने की आवश्यकता जताई। ताकि दानदाताओं को मोटीवेट कर तालाब का विकास किया जा सके। वहीं आरोप-प्रत्यारोप के बीच सभापति ने कोरी कल्पना करने के बजाय विकास में सहयोग की अपील की। गौरतलब है कि जालोरवासी आज भी आबू की नक्की झील की तरह सुंदेलाव में बोटिंग का सपना संजोए हुए हैं, लेकिन उनके लिए यह महज सपना बनकर रह गया है।
कुछ सुझाव और विरोध भी...
- बैठक में कुछ पार्षदों ने सभापति पर वार्डों में विकास कार्यों के टेंडर में पक्षपात का आरोप लगाया।
- कांग्रेस पार्षदों ने तालाब के सौंदर्यकरण से पहले गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था करने का सुझाव दिया
- उपसभापति ने सुंदेलाव पर परिषद द्वारा खर्च की जानकारी मांगी गई और इसकी पत्रावली सदन में पेश करने को कहा, लेकिन इसकी स्पष्ट जानकारी कोई नहीं दे पाया
- परिषद रिकॉर्ड में पंजीकृत गोशाला के बारे में पूछने पर सामने आया कि शहर में ऐसी सिर्फ 1 ही गोशाला पंजीकृत है और इसकी दो शाखाएं हैं, जबकि शहर में दर्जनों गोशालाएं हैं और यहां शादी समारोह तक हो रहे हैं।
- भाजपा पार्षद ने घर की छतों से बारिश का पानी बावड़ी में डालने की योजना बनाने का सुझाव दिया
- उपसभापति ने शिवाजी नगर में सीनियर सिटीजन के लिए स्मृति कुंज पार्क में नियम विरुद्ध लाइब्रेरी निर्माण का आरोप लगाया और इसमें कार्रवाई की मांग की। इस पर आयुक्त व सभापति ने जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिलाया।





No comments:
Post a Comment