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कैंसर रोगियों के लिए बांगड़ मेडिकल कॉलेज हास्पिटल में शुरू हो गई है यह सुविधा, अब नही जाना होगा बड़े शहरों में....

पाली. जिले के कैंसर रोगियों को अब उपचार करवाने बार-बार बड़े शहरों का मुंह नहीं ताकना होगा। यह संभव हो सकेगा बांगड़ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में कीमोथैरेपी की सुविधा शुरू होने से। चिकित्सकों की मानें तो पहले ज्यादातर मरीज जयपुर, जोधपुर, अहमदाबाद या बेंगलूरु जाते थे। लेकिन, अब कैंसर विशेषज्ञों से उपचार शुरू करवाने के लिए अपनी कीमोथैरेपी यहीं जिला अस्पताल में करवाते है। अभी कीमोथैरेपी के लिए 33 मरीज पंजीयन करवा चुके हैं। इनकी कीमोथैरेपी भी हो चुकी है।

यह है कीमोथैरेपी

कीमाथैरेपी ड्रग्स वे दवाएं है, जिनका प्रयोग कैंसर के सेल्स को खत्म करने के लिए किया जाता है। इनसे ट्यूमर सिकुड़ जाते हैं और कैंसर फैल नहीं पाता है। इसे एंटी कैंसर ड्रग्स व कीमोथैरेपिक एजेंट भी कहते हैं। वैसे तो बाजार में बड़ी संख्या में एंटी कैंसर ड्रग्स है। हर प्रकार का ड्रग दूसरे से थोड़े अलग तरीके से काम करता है। कैंसर के सेल्स को खत्म करने के लिए कीमोथैरेपी भी एक अच्छा तरीका है। कीमोथैरेपी कैंसर के सेल्स को शरीर के दूसरे भाग जैसे कि हड्डियों में, लीवर में या दिमाग में नहीं फैलने देता है।

स्थिति पर निर्भर

एंटी कैंसर ड्रग्स बहुत से अलग-अलग सम्मिलन के साथ आते हैं और मेडिकल आंकोलॉजिस्ट इनसे अलग-अलग तरीके से चिकित्सा करते है। कैंसर के सेल्स अलग-अलग तरीके से बढ़ते हैं। हर व्यक्ति में कैंसर ठीक होने व फैलना मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है।

नस के जरिए कीमोथैरेपी

कीमोथैरेपी सामान्य नसों द्वारा दिए गए ड्रग्स के लिए की जाती है। अधिकतर लोग इंट्रावेनस इंफ्यूजन की प्रक्रिया से एंटी कैंसर ड्रग्स लेते हैं। एक बैग जिसमें तरल ड्रग्स दवा भरी होती है उसे एक ट्यूब से जोड़ देते हैं। जिसे फिर वेन्स या नसों से जोड़ा जाता है। यह ड्रग्स धीरे-धीरे मरीज के शरीर में फैल जाता है। एंटी कैंसर ड्रग्स को इंजेक्शन या दवाइयों के रूप में भी लिया जा सकता है। कीमोथैरेपी के ड्रग्स शरीर के सभी भाग में फैल जाते हैं। इस प्रक्रिया को सिस्टमिक थैरेपी कहते हैं। कीमोथैरेपी से सूक्ष्म कैंसर के सेल्स भी निकल जाते हैं जो कि एक्स-रे या दूसरे प्रकार की जांच से भी नहीं दिखते हैं।

मरीजों को मिल रहा उपचार

- अस्पताल में कीमोथैरेपी की सुविधा शुरू होने के बाद अभी तक 33 मरीजों की कीमोथैरेपी की जा चुकी है। मरीज जब कीमोथैरेपी के लिए आता है तो उनके उपचार संबंधी जानकारी डॉक्टर से ली जाती है। उसके बाद सफलतापूर्ण कीमोथैरेपी की जाती है। इस सुविधा के शुरू होने से मरीजों पर आर्थिक भार कम पड़ रहा हैं।

- डॉ. विकास जैन, जिला कैंसर नियंत्रण नोडल अधिकारी



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