रहती है संक्रमण की आशंका
प्रतापगढ़ चिकित्सा संस्थानों से निकलने वाले मेडिकल बायोवेस्ट से संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। हालांकि चिकित्सा विभाग की ओर से प्रति माह एक हजार से अधिक आउटडोर वाली चिकित्सा संस्थानों से बायोमेडिकल वेस्ट के उचित निस्तारण के लिए उदयपुर की एक कम्पनी को ठेका दिया हुआ है। जो बायो मेडिकल वेस्ट का संग्रहण कर उदयपुर में निस्तारण इकाई में भिजवा जा रहा है। वहीं कम आउटडोर वाली संस्थानों पर डीप बोरियल पिट बनाए हुए है।इनमें निस्तारण किया जाता है।लेकिन कई प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर अभी बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण नहीं हो रहा है।
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इन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर नहीं निस्तारण
जिले में आठ पीएचसी पर अभी बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण नहीं हो रहा है।इसमें से धमोतर, केशरियावद, धोलापानी में पीएचसी के नए भवन बने है।यहां डीप बोरियल पिट भी तैयार है।लेकिन मेडिकल वेस्ट का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।यहां संक्रमण का खतरा बना हुआ है।इसी प्रकार ग्यासपुर, मानागांव, कुणी, चूपना, केसुंदा में भी बायोमेडिकल वेस्ट का उचित निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
यह है पिट में निस्तारण की व्यवस्था
जिन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर डीप बोरियल पिट बने हुए है।वहां एक से डेढ़ माह में निस्तारण किया जाता है। इन पिट में तीन हिस्से बने हुए है। इनके भरने पर उसे खाली करवाया। इसके बाद इनका निस्तारण किया जाता है।
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जिले में यहां से होता है बॉयोमेडिकल वेस्ट का संग्रहण
प्रतापगढ़ जिले के जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और निजी चिकित्सालयों से बॉयोमेडिकल वेस्ट का संग्रहण किया जाता है। जिसमें जिला चिकित्सालय, पीपलखूंट, धरियावद, छोटीसादड़ी, अरनोद, मूंगाणा, बारावरदां, पीपलखूंट के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों से बॉयोमेडिकल वेस्ट का संग्रहण किया जाता है। इसी प्रकार पारसोला, कुलथाना और सुहागपुरा के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों से भी बायोवेस्ट वेस्ट का संग्रहण किया जा रहा है। निजी चिकित्सालयों में नवजीवन, आस्था, उद्गम, चौधरी, आरोग्यश्री और पशु चिकित्सालय से भी बॉयोमेडिकल वेस्ट का संग्रहण किया जाता है।
चिकित्सा विभाग की ओर से जिले में बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए वर्ष 2009 में जिला चिकित्सालय का ठेका उदयपुर की एक कम्पनी को दिया गया था। इसके बाद अब तक जिले के 16 संस्थानों से बायोमेडिकल वेस्ट संग्रहित कर उदयपुर इकाई में नियमानुसार निस्तारण किया जा रहा है।
गत वर्ष निकला 359 क्विंटल बॉयोमेडिकल
जिले में विभिन्न चिकित्सा संस्थानों की ओर से गत वर्ष 359.55 क्विंटल बॉयोमेडिकल निकला था। जिसमें पीले कलर की बाल्टी का 315.46 क्विंटल, लाल बाल्टी का 7.09 क्विंटल, नीले और सफेद बाल्टी का 37 क्विंटल बॉयोमेडिकल निकला था।
चिकित्सालयों से उदयपुर निस्तारण इकाई तक यह प्रक्रिया
चिकित्सालय में सभी वार्डों में बॉयोमेडिकल वेस्ट के लिए अलग-अलग बाल्टियां रखी हुई हैं। इनमें पीले, नीले, लाल और सफेद रंग की बाल्टियां रखी हैं। इन बाल्टियों में बॉयोमेडिकल वेस्ट को पृथक करने के लिए निर्धारित समय पर खाली की जाती है। यहां से पूरे जिला चिकित्सालय का बॉयोमेडिकल यहां बने बॉयोमेडिकल वेस्ट स्टोर रूम में संग्रहित किया जाता है। जहां से उदयपुर की ठेकेदार कम्पनी के वाहनों में भरकर उदयपुर बॉयोमेडिकल वेस्ट इकाई में निस्तारण किया जाता है। जहां पर निस्तारण किया जाता है। ठेेके के नियमानुसार हर 48 घंटे में यहां से बॉयोमेडिकल वेस्ट को कम्पनी के वाहन में ले जाया जाता है।
यह होता है बॉयोमेडिकल वेस्ट में
चिकित्सालयों में निकलने वाले बॉयोमेडिकल वेस्ट में कई सामग्री होती है। इसमें सीरिंज, शरीर से निकला रक्त, मवाद, प्लास्टर, पट्टियां, कॉटन, प्लास्टिक की बोतलें, नलियां, प्लेसेंटा, ऑपरेशन के बाद निकले बॉडी पाट्र्स आदि शामिल रहते हैं।
निस्तारण आवश्यक, नहीं तो बाीमारियां
चिकित्सालयों से निकलने वाले बॉयोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण आवश्यक है। जिले से भी बॉयोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण किया जा रहा है। जो कई बाीमरियां से बचाव केलिए आवश्यक है। बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण नहीं होने से अस्पताल जनित बीमारियों का खतरा रहता है।
डॉ.ओपी दायमा
उप नियंत्रक, जिला चिकित्सालय प्रतापगढ़
कर रहे है नियमित निस्तारण
हमारी कम्पनी की ओर से प्रतापगढ़ जिले से वर्ष 2009 से बॉयोमेडिकल वेस्ट निस्तारण का कार्य किया जा रहा है। अभी जिले के 16 चिकित्सा संस्थानों से बॉयोमेडिकल वेस्ट का संग्रहण किया जा रहा है। जो पैक वाहनों से उदयपुर लाया जा रहा है।यहां बॉयोमेडिकल वेस्ट इकाई में नियमानुसार निस्तारण किया जा रहा है।
जैनन पटेल
प्रशासक, बायोमेडिकल, वेस्ट मैनेजमेंट फैसेलिटी, उदयपुर





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