उदयपुर . सब्जियों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने, स्वामीनाथन आयोग की सिफ ारिशें लागू करने समेत कई मुद्दों को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही किसानों की गांव बंद हड़ताल से शहरवासियों की रसोई के बजट पर मार पडऩे लगी है। सभी सब्जियों के भाव से डेढ़ से दोगुना तक बढ़ गए हैं। हालांकि मंडी में स्थानीय आवक पर कोई असर नहीं पड़ा है मगर बाहर से आने वाला माल घट गया है। देश के अन्य राज्यों व जिलों की भांति जिले में कहीं भी किसानों का विरोध सामने नहीं आया है। जिले की सब्जी मण्डियां स्थानीय आवक पर प्रभावित नहीं हुई। व्यापारियों की मानें तो जिले की प्रमुख सवीना स्थित सब्जी मण्डी में दूसरे राज्यों व जिलों से आने वाले माल में बीस प्रतिशत तक कमी आई है।
पहले ही नुकसान में, हड़ताल कैसे करें
मण्डी में आए किसानों ने बताया कि सब्जियों के पर्याप्त भाव नहीं मिलने से पहले से ही नुकसान झेल रहे हैं। ऐसे में हड़ताल में शामिल होने से जो कुछ आमदनी हो रही है, वह भी नहीं होगी। मोतीलाल माली ने बताया कि हम छोटे काश्तकार है। जो हड़ताल कर रहे हैं, उनमें अधिकतर अमीर किसान हैं। इसलिए जिले के अधिकतर किसान हड़ताल में शामिल नहीं हैं। हड़ताल करने से सब्जियां खराब हो जाएगी तो इन्हें कौन खरीदेगा? अभी जो थोड़ा-बहुत मिल रहा है, उससे भी हाथ धोना पड़ेगा।
यहां से होती है सब्जियों की आवक
व्यापारियों ने बताया कि जिले के अलावा जयपुर, मध्यप्रदेश के मंदसौर, नीमच, जावरा आदि शहरों से सब्जियां आती है। मध्यप्रदेश व जयपुर में हड़ताल का ज्यादा असर होने से वहां से सब्जियां आनी जरूर कम हुई है, लेकिन इसका इतना व्यापक असर नहीं पड़ा है क्योंकि लोकल आवक में कोई कमी नहीं हुई है। जयपुर से प्याज, आलू व लहसून आता था, जिसकी भरपाई गुजरात से हो जाती है।
इधर, आश्वासन पर खत्म की हड़ताल, व्यवसायियों ने दी थी चेतावनी
कानोड़. जहां देश भर में किसान आंदोलन के तहत सब्जियां व दूध को सडक़ों पर उड़ेल कर प्रदर्शन किया जा रहा है, वहीं कानोड़ कस्बे में सब कुछ इस आंदोलन के विपरीत नजर आ रहा है। मंगलवार को फल व सब्जी व्यापारियों ने सब्जी मण्डी बाजार, बस स्टैण्ड सहित चौराहों पर प्रदर्शन कर विरोध जताया। देर शाम व्यापारियों की वार्ता के बाद हड़ताल स्थगित कर दी गई।
एक जून को आंदोलन शुरू होते ही कानोड़ क्षेत्र में कुछ प्रदर्शनकारियों ने बड़ीसादड़ी मण्डी से आ रही सब्जियां सडक़ों पर उड़ेल दी, जिससे उन्हें हजारों का नुकसान हुआ। सैकड़ों लीटर दूध वाहनों से सडक़ों पर उड़ेला गया। जिन व्यापारियों को नुकसान हुआ उन्होंने थाने में मामला दर्ज करवा कार्रवाई की मांग की। वहीं सभी फल सब्जी व्यापारियों ने प्रतिष्ठान बंद कर दिए। व्यापारियों की मांग है कि जब तक नुकसाने पहुंचाने वालों की गिरफ्तारी व उचित कार्रवाई नहीं होगी तब तक व्यापार बंद रखकर विरोध किया जाएगा। बुधवार को एक फल व्यापारी की ओर से दुकान खोलने पर विरोध कर रहे अन्य व्यापारियो के बीच कहासुनी भी हुई ।
व्यापारियों ने पुलिस को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की। वहीं मंगलवार को पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर गिरफ्तारी नहीं होने पर रोष जताया गया। मामले में थानाधिकारी गज सिंह सिसोदिया ने बताया कि घटनाक्रम को लेकर मामले दर्ज किए गए है। अनुसंधान जारी है।
दूसरी ओर पुलिस पर दबाव बनाने के लिए किसान महापंचायत के पदाधिकारियों व कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि सरकार में दबाव में दर्ज किए फर्जी मामलो में किसी कार्यकर्ता को गिरफ्तार किया गया तो उग्र आंदोलन होगा। किसान नेता सरपंच उदयलाल जाट ने बताया कि पुलिस में दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो क्षेत्र के किसान मौन नहीं रहेंगे। इधर, 200 से अधिक किसानों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर जिला कलक्टर व एसपी को ज्ञापन दिया।





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