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उदयपुर की खाकी के दामन पर रिश्वत के इतने ‘छींटे’, चार वर्षों में इतने कार्मिक घूस लेते पकड़े गए

उदयपुर . आमजन की सुरक्षा का जिम्मा उठाने वाली पुलिस के दामन पर ही रिश्वत व अन्य अपराधों के दाग लगे हैं। ऐसे में पुलिस सेवा में जाने के बाद दिलाई जाने वाली ईमानदारी की शपथ दिखावा बनकर रह गई है। गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के गृह जिले से लेकर संभाग में भी पुलिस घूस और अन्य कई प्रकरणों में लिप्त है।

 

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भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने वर्ष 2014 से 2017 तक पुलिस विभाग के कुल 200 अधिकारी-कर्मचारियों को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। इनके विरुद्ध दर्ज कुल 275 में से 155 प्रकरणों में चालान एवं 6 प्रकरणों में अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। 114 प्रकरण अनुसंधान की विभिन्न प्रक्रियाओं में लम्बित हैं।

 

 

उदयपुर में इनके खिलाफ मामले
वर्ष 2014 में सुखेर के कांस्टेबल नाहरसिंह, ख्यालीराम व धीरज शर्मा, कोटड़ा वृत्ताधिकारी मनीष शर्मा, पानरवा पुलिस उपनिरीक्षक धूलजी मीणा और वहीं के हेड कांस्टेबल प्रभुलाल मीणा, झाड़ोल के हेड कांस्टेबल शांतिलाल चौधरी, कुराबड़ उपनिरीक्षक सुरेशकुमार, वर्ष 2015 में उपनिरीक्षक पृथ्वीसिंह व अम्बामाता थाने के कांस्टेबल केशवलाल, वर्ष 2016 में महिला थाने के दिनेश व पानरवा के उपनिरीक्षक शिवसिंह चुण्डावत, 2016 में खेरवाड़ा के हेड कांस्टेबल चन्द्रशेखर, प्रतापनगर के उपनिरीक्षक जगदीशचन्द्र सेन, घासा थाने के कांस्टेबल घनश्याम के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हुए।

 

 

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करते है तत्काल कार्रवाई
किसी भी कर्मचारी की भ्रष्टाचार में लिप्तता अपराध है। हमारे लिए तो कोई पुलिसकर्मी है या कोई अन्य अधिकारी-कर्मचारी, सभी के लिए एक ही नियम है। हमारे पास शिकायत आती है तो हम तत्काल कार्रवाई करते हैं। उदयपुर के मामलों में कुछ प्रकरण हमने जांच में रखे हैं।’
अजयपाल लांबा, पुलिस अधीक्षक, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो उदयपुर-जोधपुर



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