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उपचार के लिए विशेषज्ञ ही नहीं कैसे होगी जननी की सुरक्षा



चित्तौडग़ढ़. सरकार द्वारा जननी सुरक्षा के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही है। कई नवाचार भी किए जा रहे है। जननी की सेहत सुरक्षा को लेकर कई प्रावधान बनाए गए है। इसके बावजूद जननी सुरक्षित नहीं है, इसका कारण जिले में महिलाओ की सेहत सुरक्षा के लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ ही पूरे नहीं है। ऐसे में जननी को नि:शुल्क दवा तो मिल जाती है और प्रसव बाद देखभाल के लिए राशि भी मिल रही है लेकिन सेहत जांच के लिए चिकित्सक नहीं मिलते। जिले में गाइनोकोलॉजिस्ट की भारी कमी है। ऐसे में दुर दराज गांवो में रहने वाली औरतो को भी अपने ईलाज के लिए जिला चिकित्सालय पहुंचना पड़ता है। जिले में जिला चिकित्सालय और उप जिला चिकित्सालय के अतिरिक्त ११ ब्लॉको में कुल ४८ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और २१ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है। ग्रामीण क्षेत्रो में गाइनोकोलॉजिस्ट के १० स्वीकृत पदों की जगह ३ गाइनोकोलॉजिस्ट कार्यरत है। इस कारण से प्रसूताओ का पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पा रही है।

महिला स्वास्थ्य की योजनाएं फेल
प्रसव के समय भी अधिकतर महिलाओ को या तो जिला चिकित्सालय में रेफर किया जाता है या फिर अस्पतालों की दूरी को देखते हुए परिवार वाले ही दाई से डिलवरी करवा लेते है। कई बार घरो में डिलीवरी होने से शिशुओ के साथ प्रसुताओ की भी स्थिती नाजुक हो जाती है। महिलाओ को गायनो संबंधित कई समस्याएं होती है जिसके लिए स्त्री रोग विशेषज्ञ का होना आवश्यक है। लेकिन गांवो के कई महिलाएं पास के चिकित्सालय में जांच के लिए जाती है तो डॉक्टर और संसाधनो के अभाव में मायूस लौटना पड़ता है।

निम्बाहेड़ा में एक चिकित्सक
के भरोसे
जिला चिकित्सालय में वरिष्ठ विशेषज्ञ में स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में डॉ. ओमप्रकाश उपाध्याय, कनिष्ठ विशेषज्ञ में डॉ. हेमलता बक्षी, डॉ. प्रतिभा सनाढ़्य कार्यरत है। वहीं उपजिला चिकित्सालय निम्बाहेड़ा में डॉ. नीलम भोजवानी कार्यरत है। ग्रामीण क्षेत्रो में १० पदो के बदले केवल तीन डॉक्टर ही बेंगु में डॉ. दीवेन्द्र नागर, बड़ी सादड़ी में डॉ. राजीव मंगल , डूंगला में डॉ. माधव सिंह मीणा
कार्यरत है।



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