सूरवाल. कस्बे में सीतारामजी मंदिर के पास गोसाई बाबा देव स्थान परिसर में रविवार को सार्वजनिक श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आगाज हुआ। कथावाचक राधादास महाराज ने पहले दिन श्रद्धालुओं को श्रीमदभागवत कथा तथा ज्ञान और कर्म का जीवन में महत्व बताया। साथ ही परोपकार और सदाचरण को अपनाने के लिए प्रेरित किया। इससे पूर्व कलश यात्रा निकाली गई।
प्रधान कलश की बोली 14 हजार रुपए तक हंसराज प्रजापत के नाम और श्रीमद्भागवत गीता की बोली 11 हजार रुपए तक सूरवाल सरपंच धर्मराज मीना के नाम छूटी। कार्यक्रम में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कथा का समय सुबह ग्यारह से दोपहर तीन तक निर्धारित है। कथा 30 जून तक चलेगी। सरपंच धर्मराज मीना ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन स्वामी कृष्णानंद महाराज की पावन स्मृति में आयोजित किया जा रहा है।
मित्रपुरा. समीपवर्ती गांव मानपुर में तीन दिवसीय मीन भगवान की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के तहत भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और प्रसादी ग्रहण की। आयोजन के दूसरे दिन स्वामीजी महाराज मित्रपुरा ने यज्ञ के हवन कुंडों पर विराजमान यजमानों को एवं भक्तगणों को आशीर्वाद दिया। मीन भगवान सेवा समिति सदस्यों ने बताया कि 25 तारीख को पूर्व वित्त मंत्री नमोनारायण मीणा, पूर्व विधायक नवल किशोर मीणा सहित क्षेत्र के अन्य कई नेता शिरकत करेंगे।
कलश यात्रा में उमड़ा श्रद्धा का ज्वार
शिवाड़. मंगल गीत गाती महिलाएं, जगह-जगह पुष्प वर्षा, धार्मिक भजनों पर नाचते महिला-पुरुष एवं युवा तथा स्वागत को आतुर लोग। कमोबेश यही नजारा रविवार को कस्बे में निकाली गई कलशयात्रा एवं शोभायात्रा में देखने को मिला। कस्बे में वीर तेजाजी समिति एवं ग्रामीणों की ओर से सोमवार को बड़े तालाब के पास स्थित वीर तेजाजी मंदिर के पास सोमवार को पंचमुखी हनुमानजी की प्राण-प्रतिष्ठा व मूर्ति स्थापित की जाएगी।
इसको लेकर रविवार को श्रद्धालुओं ने गाजे-बाजे से कलशयात्रा निकाली। इससे पहले बड़ा अस्पताल स्थित गणेश मंदिर में पंडित महेश पाराशर, प्रदीप पाराशर, आचार्य कुंजजबिहारी के सान्निध्य गणेश जी पूजा-अर्चना कराई गई। यहां से रवाना हुई शोभायात्रा श्रीघुश्मेश्वर मंदिर रोड, छोटा बाग, कल्याणजी मंदिर, कुशवाह मोहल्ले होते हुए बड़े तालाब के पास स्थित वीर तेजाजी मंदिर के पास पंचमुखी हनुमान मंदिर पहुंची। शोभायात्रा का तेजाजी मंदिर समिति एवं लोगों ने स्वागत किया गया। आचार्य ने हवन पूजा-अर्चना करवाई। इसके बाद प्रसादी का वितरण किया गया।





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