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अचानक बरसा मेघ तो जिम्मेदारों की खुलेगी पोल, मानसून सिर पर, तैयारियां आधी-अधूरी

सिरोही. मानसून दस्तक देने को हैं, लेकिन जिले में प्रशासन आधी-अधूरी तैयारी के साथ संभावित आपदा से निपटने के लिए कमर कस चुका है। हाल यह है कि जिम्मेदार विभागों ने अब तक कई बांधों की सुध तक नहीं ली है। इतना ही नहीं जल संसाधन विभाग के पास न तो नाव है और न ही नाविक। जिले में पिछले वर्षों में आई बाढ़ व अतिवृष्टि के मद्देनजर जिला आपदा प्राधिकरण की ओर से इस बार संभावित बाढ़-अतिवृष्टि से निपटने की तैयारी की जा चुकी है, लेकिन बाढ़ के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला जल संसाधन विभाग अब भी कोई खास तैयारी नहीं कर पाया है। ऐसे में आपदा के दौरान प्रशासन के पंगू होने की आशंका बनी हुई है। जल संसाधन विभाग ने बांध एवं एनिकट की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध नहीं किए हैं। जबकि गत वर्ष अतिवृष्टि के चलते जिले के कई एनिकट तथा अणगौर बांध ओवरफ्लो होकर टूट गया था। जिससे जिले के कई गांवों में बाढ़ के हालात हो गए थे।

जिले में 35 बड़े बांध
जिले में 35 बड़े बांध है। जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी जल संसाधन विभाग के पास है। वहीं 32 छोटे बांध व दर्जनों एनिकट की जिम्मेदारी पंचायत राज विभाग की है। जिले में जल संसाधन विभाग के पास अणगौर, धांता, कामेरी, पासिंद्रा, अखेलाव, मानसरोवर, वराल, बरलूट, नवारा, वागेरी, मूंगथला, गिरवर, कुईसांगना, चनार, महादेव नाला, वाजना, वेस्टबनास, वालोरिया, गंगाजलिया, टोकरा, बूटड़ी, उड़वारिया, करोड़ीध्वज, सरूपसागर, वेस्ट बनास आदि बड़े बांध है।

रेत के कट्टे न माकूल बंदोबस्त
बांधों व बाढ़ के संभावित स्थलों पर अब तक रेत के कट्टे तक नहीं रखवाए गए हैं। हालांकि, जल संसाधन विभाग ने अणगौर, धांता तथा कामेरी बांध की गेट पर ऑयल-ग्रीस का कार्य तो करवा दिया, लेकिन रेत से भरे कट्टे नहीं रखे गए हैं। यहां पिछले वर्ष डाले गए रेत के कट्टे फट चुके हैं। हालांकि, विभाग इन बांधों की सुरक्षा में कोई सुराख नहीं होने का दावा कर रहा है। विभाग ने जिला मुख्यालय स्थित कार्यालय में कंट्रोल रूम स्थापित कर लिया है।

नाव के लिए मत्स्य विभाग पर निर्भर
जल संसाधन विभाग के पास बाढ़ जैसी विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए नाव का पुख्ता प्रबंध नहीं है। ऐसे में आपदा से निपटने के लिए इस विभाग को नाव के लिए मत्स्य विभाग पर निर्भर रहना पड़ता है। वहीं बाढ़ में डूबने के हालात पैदा होने पर या तो पुलिस के गोताखोरों की मदद लेनी पड़ती है, या फिर गांवों के अच्छे तैराकों की मदद ली जाती है।

इनका कहना है...
जिले के सभी बांधों पर तैयारी चल रही है। बांधों पर सुरक्षा दृष्टि के हिसाब से मिट्टी के कट्टों को रखा जाएगा। अणगौर की मोरी की मरम्मत तथा गेज की संख्या लिखने का काम जारी है।
-प्रकाचन्द्र, सहायक अभियंता, जल संसाधन विभाग, सिरोही



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